लखनऊ : डॉ. अजय वर्मा के शोध से लंग कैंसर से पीड़ित गंभीर मरीजों को मिलेगा फायदा, दवा का साइड इफेक्ट होगा कम
लखनऊ, अमृत विचार। एडवांस स्टेज के लंग कैंसर के इलाज में प्रयोग होने वाली कीमोथेरेपी ड्रग्स Docetaxel का साइड इफेक्ट अब मरीजों पर कम होगा। यह साइड इफेक्ट नैनो तकनीक से कम होगा। इस बात का खुलासा कजीएमयू के डॉ. अजय वर्मा के शोध में हुआ है। इसके लिए अजय वर्मा को सम्मानित भी किया जा चुका है। अजय वर्मा का यह शोध वैक्सीन जनरल में भी छप चुका है। इसके लिए अजय वर्मा को सम्मानित भी किया गया है। अजय वर्मा के इस शोध से लंग कैंसर से पीड़ित मरीजों के इलाज में आसानी होगी।
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— amrit vichar (@amritvicharlko) December 25, 2023
केजीएमयू स्थित रेस्पेरेटरी विभाग के प्रो. अजय वर्मा ने पहले चूहों पर शोध किया। जिसके बाद आये परिणाम के आधार पर पांच कैंसर से पीड़ित व्यक्तियों का ब्लड सेंपल लेकर उस पर भी जांच की गई। जिसके नतीजे सकारात्मक रहे।
केजीएमयू स्थित रेस्पेरेटरी विभाग के प्रो. अजय वर्मा ने बताया कि लंग कैंसर के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। पहले लंग कैंसर अधिक उम्र में होता था, लेकिन धूम्रपान और प्रदूषण की वजह से अब कम उम्र के युवा भी इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं।
नैनो तकनीक से कैंसर सेल पर वार करेगी दवा
प्रो. अजय वर्मा के मुताबिक इस तकनीक की वजह से कीमोथेरेपी ड्रग्स Docetaxel सिर्फ कैंसर सेल्स पर असर करेगी यानी टारगेटेड थेरेपी देने में कारगर साबित होगी। इस तकनीक से स्वस्थ कोशिकाओं पर दवा का साइड इफेक्ट नहीं होगा। जिससे मरीजों का इलाज बेहतर हो सकेगा।
बीमारी की जानकारी में हो जाती है देर
प्रो. अजय वर्मा ने यह भी बताया कि फेफड़े के कैंसर की जानकारी होने में समय लगता है। इसके पीछे की वजह टीबी और लंग यानी फेफड़े के कैंसर के लक्षण काफी मिलते जुलते हैं। इस वजह से बीमारी की डायग्नोसिस बनने में देर होती है और मरीज की बीमारी एडवांस स्टेज तक पहुंच जाती है। जिससे लंग कैंसर के मरीज की सर्जरी नहीं हो पाती है। ऐसे में मरीज का इलाज कीमोथेरेपी के जरिये किया जाता है। कीमोथेरीपी में प्रयोग होने वाली दवा का साइड इफेक्ट होता है, लेकिन नैनो तकनीक से दवा सीधे कैंसर कोशिकाओं पर असर करेगी। जिससे मरीज को बेहतर इलाज दिया जा सकता है।
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