विधवा पेंशन फर्जीवाड़ा: तत्कालीन डीपीओ और बीडीओ के बचते-बचते फिर नपने की नौबत
बरेली, अमृत विचार। रामनगर ब्लॉक के गोठा खंडुआ गांव में 40 से ज्यादा विवाहित महिलाओं को विधवा पेंशन देने के मामले में जांच के नाम पर कागजी खानापूरी कराकर अपनी जवाबदेही से साफ बच निकले अधिकारी और कर्मचारी फिर घिर गए हैं। डीएम के आदेश पर इस मामले में नए सिरे से जांच शुरू हो गई है।
तत्कालीन डीपीओ के साथ उनके कार्यालय में तैनात रहे अधिकारियों-कर्मचारियों, बीडीओ, एडीओ पंचायत और ब्लॉक के बाबू को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। माना जा रहा है कि जल्द ही इस मामले में हर स्तर पर दोष निर्धारण कर बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
गोठा खंडुआ में अपात्र महिलाओं को विधवा पेंशन देने का हैरतअंगेज फर्जीवाड़ा हुआ था। शुरुआत में गांव के पूर्व प्रधान सत्यपाल और मिथुन सिंह की ओर से संपूर्ण समाधान दिवस में की गई शिकायत को अफसरों ने जहां के तहां दबा दिया लेकिन अमृत विचार ने इसे मुद्दा बनाया तो तत्कालीन डीएम शिवाकांत द्विवेदी को जांच का आदेश देना पड़ा।
एसडीएम आंवला और जिला प्रोबेशन अधिकारी की अध्यक्षता में गठित टीमों ने जांच की लेकिन इस जांच में सरकारी अफसरों और कर्मचारियों को साफ बचा दिया गया। प्रधान पति विवेक शर्मा, पंचायत सहायक के पति राहुल और दो दलाल गंगाराम और आसिफके खिलाफ एफआईआर कराकर मामला रफादफा कर दिया गया।
पिछले दिनों डीएम रविंद्र कुमार ने उन्होंने विधवा पेंशन फर्जीवाड़े की नए सिरे से जांच का आदेश दिया तो इन अफसरों और कर्मचारियों की मुसीबत बढ़ गई। तत्कालीन डीपीओ, उनके दफ्तर के कर्मचारियों, तत्कालीन और मौजूदा बीडीओ, ब्लॉक के बाबू, तत्कालीन और मौजूदा एडीओ पंचायत को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। तत्कालीन डीपीओ नीता अहिरवार की ओर से इस पर अपना स्पष्टीकरण दे भी दिया गया है।
फर्जीवाड़े में किसकी क्या भूमिका तय करेंगे सीडीओ और पीडी
अपात्र महिलाओं को विधवा पेंशन जारी करने में इन अधिकारियों और कर्मचारियों में से किसकी क्या भूमिका रही, डीएम ने जांच पूरी होने के बाद यह तय करने की जिम्मेदारी सीडीओ जगप्रवेश और पीडी तेजवंत सिंह को दी है। सभी का जवाब दोनों अधिकारियों के पास पहुंचेगा। रिपोर्ट सामने आने के बाद डीएम तय करेंगे कि किस पर क्या कार्रवाई होनी है। बता दें कि इस फर्जीवाड़े में प्राइवेट लोगों पर कार्रवाई कर सरकारी अफसरों और कर्मचारियों को बचा देने पर एमएलसी कुंवर महाराज सिंह ने पिछले दिनों दिशा की बैठक में सवाल उठाया था।
तत्कालीन डीएम ने लौटा दी थी एसडीएम की जांच रिपोर्ट
एसडीएम आंवला की ओर से पहली बार में की गई जांच के बाद दी गई रिपोर्ट को तत्कालीन डीएम वापस लौटा दिया था और दोबारा जांच का निर्देश दिया था। बताया जाता है कि पहली रिपोर्ट में उन अधिकारियों और कर्मचारियों के भी नाम थे जिनकी इस फर्जीवाड़े में भूमिका थी लेकिन दूसरी बार रिपोर्ट डीएम के पास पहुंची तो ये सारे नाम गायब हो गए। सिर्फ गैरसरकारी लोगों के ही नाम रह गए। दूसरी बार जांच करने में भी एसडीएम को लंबा समय लगा था।
अपात्रों को विधवा पेंशन दिए जाने के मामले में नए सिरे से जांच चल रही है। छह-सात लोगों से जवाब मांगा गया है। तत्कालीन डीपीओ का स्पष्टीकरण आ चुका है। किस स्तर से क्या गड़बड़ी हुई है, यह तय होने के बाद डीएम कार्रवाई के बारे में फैसला करेंगे। - जग प्रवेश, सीडीओ
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