बरेली: छुट्टा पशुओं, सूखी नहरों और बकाया गन्ना भुगतान के मुद्दे पर किसानों का हल्ला बोल

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। छुट्टा पशुओं पर प्रशासन और नेताओं के हवाई दावों के साथ सूखी पड़ीं नहरों और गन्ने का बकाया भुगतान न किए जाने पर सैकड़ों किसानों ने मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के बैनर तले जिला मुख्यालय पर हल्ला बोला।

दामोदर स्वरूप पार्क में महापंचायत के बाद किसानों ने कमिश्नरी पहुंचकर कमिश्नर कार्यालय घेर लिया और जमकर नारेबाजी की। किसानों ने दोपहर का खाना यहीं खाया और रात तक डटे रहे। अपर आयुक्त न्यायिक प्रीति जायसवाल के एक सप्ताह में तीनों समस्याएं हल करने के आश्वासन पर करीब नौ बजे लौटे।

दामोदर पार्क में हुई किसान महापंचायत में मंडल अध्यक्ष चौधरी अरुण सिंह राठी ने कहा कि पूरे मंडल में किसानों की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। छुट्टा पशुओं की वजह से किसानों की जिंदगी नर्क हो गई है लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है। गन्ने के बकाया भुगतान और नहरों की सफाई के मुद्दे पर सिर्फ हवाई दावे किए जा रहे हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए पिछले तीन महीनों में तीन बार ज्ञापन दिया जा चुका है, लेकिन एक भी समस्या का निस्तारण नहीं हुआ। किसान इस वजह से बुरी तरह परेशान हैं।

महापंचायत के दौरान ही कमिश्नर कार्यालय का घेराव कर वहीं डेरा डालने की रणनीति बनी, इसके बाद शाम को किसानों का हुजूम ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से कमिश्नर कार्यालय पहुंच गया और नारेबाजी करते हुए अपनी समस्याओं के समाधान की मांग शुरू कर दी। किसानों के घेराव करने की सूचना पर अपर आयुक्त न्यायिक प्रीति जायसवाल, सिटी मजिस्ट्रेट रेनू सिंह, अपर नगर मजिस्ट्रेट प्रथम पहुंचे। काफी देर अफसरों और किसानों के बीच बातचीत का दौर चला। 

बातचीत के बाद मंडल अध्यक्ष ने यह कहते हुए प्रदर्शन खत्म करने का एलान किया कि अपर आयुक्त न्यायिक ने सभी मांगों का समाधान एक सप्ताह के अंदर करने का आश्वासन दिया है। बातचीत के दाैरान संगठन के जिलाध्यक्ष बरेली तेजपाल गंगवार, बदायूं जिलाध्यक्ष रामचंद्र यादव, शाहजहांपुर जिलाध्यक्ष सरदार संदीप सिंह, पीलीभीत जिलाध्यक्ष सरदार मंजीत सिंह, दिनेश कुमार समेत काफी संख्या में पदाधिकारी, किसान आदि मौजूद रहे।

कमिश्नरी में डेरा डालने के इरादे से रजाई-गद्दे लेकर पहुंचे थे किसान
कई बार ज्ञापन देने के बाद भी समस्याएं हल न होने की वजह से संगठन के लोग इस बार आक्रामक थे। दामोदर स्वरूप पार्क में ही रात के खाने की व्यवस्था कर ली गई थी। पूड़ी, सब्जी बनाने के बाद वे ट्रैक्टर-ट्रॉली में रजाई-गद्दे डालकर कमिश्नरी पहुंचे थे। किसी उच्चाधिकारी से वार्ता न होने या ठोस आश्वासन न मिलने पर रात में कमिश्नरी में ही डेरा डालने का इरादा था। दोपहर का खाना भी उन्होंने कमिश्नरी में ही बैठकर खाया।

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