पीलीभीत: बयानबाजी में बीत गया पूरा साल, पालिका तो अपने ही ड्रीम प्रोजेक्ट पूरे नहीं कर पाई
पीलीभीत, अमृत विचार। शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के दावे किए गए। योजनाओं की लंबी चौड़ी फेहरिस्त करने के साथ अधूरे पड़े कामों को पूरा करने का वादा किया गया। लेकिन विदा होते साल 2023 के अंत तक किसी भी नई योजना पर शहर में काम नहीं किया गया। वहीं पुरानी योजनाओं को भी पूरा करने में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई जा सकी। नतीजतन नगर पालिका में एक भी ड्रीम प्रोजेक्ट रफ्तार नहीं पकड़ सका। जिससे शहर की तस्वीर बदरंग नजर आ रही है।
बता दें कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर में कूड़ा निस्तारण के लिए पहला मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर बनाने के लिए वर्ष 2020 में फैसला लिया गया था। शासन द्वारा करीब 33.50 लाख रुपये का बजट भी आवंटित किया गया था। शेल्टर होम के पीछे खाली पड़ी सरकारी जगह पर इसका निर्माण कराया गया था। दो साल पहले इसका निर्माण पूरा हो चुका है। मगर सिस्टम की उदासीनता के चलते इसका संचालन शुरू नहीं हो सका। कहने को तो शासन ने इस सेंटर को चलाने के लिए मशीनें भी मुहैया कराई है। मगर आज तक उन मशीनों को इंस्टॉल नहीं किया गया है।
इतना ही नहीं बिजली कनेक्शन करा दिया गया है, लेकिन इसका भुगतान कौन करेगा। यह तय नहीं हो सका है। जिसको लेकर शासन में वार्ता कर निस्तारण करने का आश्वासन पालिका की ओर से दिया जा रहा है। हालांकि नगर पालिका के अफसर मैनुअल तरीके से गीला और सूखा कूड़ा अलग करने का दावा कर रहे हैं।चेयरमैन डॉ. आस्था अग्रवाल का दावा है कि यह सभी पुराने प्रोजेक्ट है,उसको सुधारने का काम किया जा रहा है।
हैंडओवर के बाद भी एफएसटीपी का संचालन ठप
शहर में पहला एफएसटीपी (फीकल सल्ज ट्रीटमेंट प्लांट) चालू करने की कवायद वर्ष 2019 में की गई थी। जिसका संचालन नगरपालिका को करना है। इससे शहर के शौचालयों की गंदगी का बेहतर ढंग से निस्तारण किया जाएगा।
दो साल पहले शासन ने 4.19 करोड़ का बजट जारी करते हुए निर्माण करने की अनुमति दी थी। निर्माण जल निगम की ओर से कराया जा रहा है। लेकिन हीलाहवाली के चलते निर्धारित समय के अनुरूप निर्माण पूरा नहीं हो सका है। कुछ माह पहले ही नगरपालिका ने इसको हैंडओवर लिया है। वर्तमान बोर्ड का कहना है कि इस जगह का चयन गलत किया गया है। ऐसे में अगर बाढ़ आई। तो कुछ भी नहीं बचेगा। फिलहाल हैंडओवर होने के बाद भी इसका संचालन शुरू नहीं हो सका है।
छह साल में बन सका टिनशेड, कूड़ा निस्तारण नहीं
शहर को कूड़े से निजात दिलाने के लिए नगर पालिका ने वर्ष 2018 में जहानाबाद हाईवे पर मीरापुर मुस्तकिल के पास ट्रेचिंग ग्राउंड बनाने के लिए 12 एकड़ जगह खरीदी थी। जहां सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट बनाया जाएगा। जहां पूरे शहर का कूड़ा डाला जाएगा। साथ ही कूड़े का निस्तारण करने की योजना बनाई थी। जहां ठोस कूड़े का निस्तारण किया जाएगा। लेकिन अभी तक ट्रेचिंग ग्राउंड का काम पूरा नहीं हो सका। ऐसे में अभी शहर में बनाए गए अस्थाई डलावघर पर ही कूड़े का ढेर लगा रहता है।
इस वजह से इस गर्मी के मौसम में कूड़े से उठने वाली दुर्गंध को झेलना पड़ता है। इसके लिए 6.17 करोड़ का बजट आवंटित किया गया था। मगर अभी तक ट्रंचिंग ग्राउंड पर सिर्फ छह साल में टिनशेड बनकर तैयार हो सका है। अफसरों ने उम्मीद जताई थी कि 2023 में काम पूरा हो जाएगा। मगर पूरा साल सिर्फ बातों में ही बीत गया। लेकिन काम पूरा नहीं हो सका है। अब नए साल में भी लोगों को कूड़े से निजात नहीं मिल सकी है।
सभी प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है। एमआरएफ सेंटर के लिए मशीनों को आर्डर हो चुका है। जल्द ही मशीनें मिलने की उम्मीद है। ट्रेचिंग ग्राउंड पर भी कूड़े का निस्तारण कराया जा रहा है। शहर का जितना भी कूड़ा होता है, वहां ही डाला जाता है। जल्द ही समस्त समस्याओं का समाधान किया जाएगा। जिसके बाद शहर को पूरी तरह से कूड़े से निजात मिलेगी। - डॉ.आस्था अग्रवाल, चेयरमैन, नगर पालिका पीलीभीत
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