Fatehpur News: सूखती झील होने से दूर हो रहे मेहमान परिंदे, कीटनाशक दवाओं के प्रयोग से दोआबा हुई सुनसान
फतेहपुर में झीलों के सूखने से विदेशी पक्षी लगातार नदारद होते जा रहे हैं।
फतेहपुर में कभी दोआबा की झीलों में विदेशी पक्षी मेहमान बन कर आते थे तो लोगों के लिए आकर्षण केन्द्र बन जाते थे। लेकिन अब सर्दी के मौसम में झीलों में मेहमान परिंदों की चहचहाट अतीत बनती जा रही है।
फतेहपुर, अमृत विचार। कभी दोआबा की झीलों में विदेशी पक्षी मेहमान बन कर आते थे तो लोगों के लिए आकर्षण केन्द्र बन जाते थे। लेकिन अब सर्दी के मौसम में झीलों में मेहमान परिंदों की चहचहाट अतीत बनती जा रही है। सिमटते झीलों का स्वरूप, कीट नाशक दवाओं के प्रयोग से मेहमान परिंदों ने दोआबा से दूरी बना ली है। करीब पांच साल से लोग विदेशी पक्षियों की राह देख रहे हैं।
इन पक्षियों का रहता था प्रवास
वन विभाग के रेंजर आरएल सैनी की माने तो डार्टर, ग्रे ढिरोन, परपल डिरोन, व्हाइट आईबिस, ब्लैक आइबिस, स्यूज बिल, बार हैडेट ग्रूज, पिंटेल, कोम्ब डक, कुकूड डक, स्परिड डक, ग्रे हार्न बिल सहित एक सैकड़ा साइबेरियन पक्षी प्रवास पर आते रहे हैं।
चार से 17 डिग्री तक में रहते थे पक्षी
साइवेरियन पक्षी चार से लेकर 17 डिग्री सेल्सियस तक वाले स्थानों पर आकर प्रवास करते थे। वहीं 25 डिग्री वाले स्थानों पर भी इन्हें देखा जाता रहा है। लेकिन जलाशयों की कमी के साथ ही पेड़ों की कमी के कारण अब यह ठिकाना नहीं बना रहे।
एकांतवास करते है पसंद
साइबेरियन पक्षी शोर-शराबे से दूर एकांतवास में रहना पसंद करते हैं। इन्हे दोआबा की अखनई झील, भलेवा झील, मानिकपुर झील, सेमरामानापुर झील सहित जलाशयों वाले अन्य स्थानों पर अपना ठिकानो बनाते रहे हैं। लेकिन बढ़ती जनसंख्या व घटते झीलों के आकार से अब इनके दीदार नहीं हो पा रहे हैं।
झीलों पर अतिक्रमण से हुए गायब
झीलों के सूखने व उन पर होने वाले अतिक्रमण के कारण झीलों का क्षेत्रफल कम हो जाने से विदेशी पक्षियों के आने पर वीराम लगा हुआ है। दोआबा में जलाशयों की संख्या दिन प्रतिदिन कम हो जाने के कारण अब यह पक्षी यहां पर नहीं दिखाई दे रहे हैं।
सर्दी शुरू होते ही आगमन, मार्च में वापसी
साइबेरियन पक्षी विदेशों में पारा माइनस में पहुंचने के कारण दीपावली के समय दोआबा के जलाशयों के किनारे अपना ठिकाना बनाते रहे हैं। जो यहां पर प्रजनन भी करते थे तथा होली के समय मार्च में अपने बच्चों सहित वापसी कर लेते थे। लेकिन अब नहीं दिखाई देते।
