बरेली: 19 साल पुराना वेतन मंजूर नहीं...66 गुना बढ़ चुकी जमीन की दर से हो भुगतान
बरेली, अमृत विचार: इंडियन टर्पेटाइन रेजिन लिमिटेड कंपनी (आईटीआर) के कर्मचारियों के साथ शुक्रवार को सर्किट हाउस में वन मंत्री अरुण कुमार और अपर आयुक्त न्यायिक प्रीति जायसवाल की मौजूदगी में बैठक हुई। आईटीआर कंपनी के लोगों ने साफ कहा कि उन्हें 19 साल पुराना वेतन अब मंजूर नहीं है। प्रशासन या तो 66 गुना बढ़ चुकी जमीन की कीमत के हिसाब से भुगतान करे या फिर कॉलोनी में आवास आवंटित कर दे। तीन प्रस्ताव पर विचार किया गया। अब यह प्रस्ताव मंंडलायुक्त को भेजे जाएंगे। वह बोर्ड से पास कराकर शासन को भेजेंगी।
दरअसल, सीबीगंज में सरकार की आईटीआर कंपनी 2004 में बंद हो गई थी। यहां काम कर रहे करीब 300 कर्मचारियों का वेतन रुक गया था। बाद में भुगतान हुआ, लेकिन 94 लोगों को वेतन अब तक नहीं मिला है। अब कर्मचारी सीबीगंज कॉलोनी में ही रहते हैं। इस कंपनी की प्रबंध निदेशक और अध्यक्ष कमिश्नर होते हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि प्रशासन ने कई बार आवास खाली कराने के लिए दबाव बनाया। परेशान होकर वह लोग कोर्ट चले गए, जहां से कर्मचारियों को सभी सुविधाएं देने के आदेश दिए गए थे। उसके बाद से कर्मचारियों और प्रशासन के बीच मामला चला आ रहा है। अभी इसको लेकर कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल सका है।
समस्या के समाधान के लिए सांसद संतोष गंगवार और वन मंत्री अरुण कुमार के प्रयासों से शुक्रवार को सर्किट हाउस में बैठक बुलाई गई, जिसमें कमिश्नर की जगह पर अपर आयुक्त न्यायिक प्रीति जायसवाल पहुंचीं। वहीं, दिल्ली होने की वजह से सांसद संतोष गंगवार बैठक में नहीं आ सके। वन मंत्री और अपर आयुक्त न्यायिक की मौजूदगी में बैठक हुई।
कर्मचारी यूनियन के महामंत्री पीसी पाठक ने कहा कि उन्हें 2004 वाला वेतन अब नहीं चाहिए। कहा कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए या तो उन्हें आवास दिए जाएं या फिर तत्कालीन कमिश्नर की ओर से पूर्व में शासन को भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार जो कर्मचारी रह रहे हैं उन्हें आवास, बाकी को पास में ही जमीन दे दी जाए।
अगर इस पर भी बात नहीं बनती है तो 66 गुना बढ़ सकी सीबीगंज में जमीन की दर के हिसाब से भुगतान हो। वन मंत्री ने कहा कि तीनों प्रस्तावों को कमिश्नर को भेजा जाए। वह बोर्ड से इसे पास कराकर शासन को भेजें। वह शासन में बात कर रास्ता निकालेंगे। वीरसिंह राज, शिवलोचन उपाध्याय, देव पाल सिंह चौहान आदि मौजूद रहे।
