Special News: बदले-बदले से सरकार नजर आते, हैलट के आसार अच्छे नजर आते… मरीजों का बढ़ा विश्वास, पढ़िए पूरी खबर

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर के हैलट अस्पताल के प्रति मरीजों का विश्वास बढ़ रहा है।

कानपुर के हैलट अस्पताल के प्रति मरीजों का विश्वास बढ़ रहा है। 2022 की अपेक्षा इस वर्ष अधिक मरीज आए।

कानपुर, (विकास कुमार)। हैलट जा रहे इलाज कराने... पहले यह सुनते ही कोई करीबी चीखता था, अरे मत जाओ, बेड पर डाल देंगे, कोई देखेगा तक नहीं। बोलोगे तो पिटाई होगी। जिंदा न लौट पाओगे.....हैलट की ये बदरंग तस्वीर अब सुधर रही है। पहले सब जगह से मरीज को जवाब दे दिया जाता था तो मजबूरी में लोग अपने मरीज को लेकर हैलट आते थे, अब सीधे हैलट आ रहे हैं।

कुछ डॉक्टरों और स्टॉफ का रवैया मरीजों के प्रति ठीक नहीं होने से कई मरीज यहां से बिना इलाज के लौट जाते थे। मार-पीट लगभग रोज की बात थी। पर अब इसमें काफी हद तक कमी आई है। वर्ष 2023 में लोगों का हैलट के प्रति विश्वास बढ़ा है। अच्छा व जटिल बीमारियों का भी इलाज मिलने लगा है। इसी का नतीजा है कि 2022 की तुलना में 2023 में ज्यादा मरीज आए। मरीज कहते भी हैं कि अब बदले-बदले से सरकार नजर आते हैं, आसार अच्छे नजर आते हैं।

छह अस्पताल, 17 से अधिक जिलों के मरीज

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से हैलट, बाल रोग, जच्चा-बच्चा, मुरारी लाल चेस्ट और संक्रामक रोग अस्पताल संबंद्ध हैं। वही, अब यहां पर सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल का भी संचालन किया जा रहा है, जिसे मिनी पीजीआई बोला जा रहा है। इन छह अस्पतालों में कानपुर के साथ ही कानपुर देहात, औरैया, इटावा, कन्नौज, फर्रुखाबाद, हमीरपुर, बांदा, जालौन, फतेहपुर, चित्रकुट, उन्नाव समेत 17 से अधिक जिलों से लोग इलाज कराने को आते हैं। 

11 लाख मरीज ओपीडी में इलाज कराने आए

वर्ष 2023 में हैलट में करीब 11 लाख मरीज ओपीडी में इलाज कराने को पहुंचे। जबकि यह आंकड़ा वर्ष 2022 में नौ लाख के करीब था। इन आंकड़ों में दो लाख लोगों का अंतर होने से यह बात साफ है कि लोगों का हैलट अस्पताल के प्रति विश्वास बढ़ा है। इस वर्ष डेढ़ लाख से अधिक मरीज भर्ती हुए और पिछले साल की अपेक्षा यहां पर इस वर्ष मेजर व माइनर ऑपरेशन भी ज्यादा हुए। खास बात यह है कि इन लाखों मरीजों का भार 203 डॉक्टरों पर ही था, जिसमें से 81 संविदा पर तैनात हैं। 

शोध के लिए मिले साढ़े तीन करोड़ रुपये 

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज मरीजों की सुविधा को और बेहतर करने के लिए नए-नए शोध करता है। कॉलेज के प्राचार्य प्रो.संजय काला ने बताया कि इस वर्ष साढ़े तीन करोड़ रुपये शोध के लिए मिला है। वर्तमान में तीन शोध आईसीएमआर, बाल रोग विभाग के तीन और सात शोध स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की डॉक्टरों द्वारा किए जा रहे हैं। एक शोध प्राचार्य प्रो.संजय काला द्वारा भी किया जा रहा है। 

गर्व है गनेशियंस पर

इस वर्ष जीएसवीएम को दो अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट भी मिले हैं। पहला पेटेंट नेत्र रोग विभाग के प्रो. परवेज खान के शोध और दूसरा पेटेंट बाल रोग में प्रो. यशवंत राव व उनकी टीम द्वारा तैयार की गई अमृत डाइट को मिला है। 

क्विक रिस्पांस टीम की गई गठित 

हैलट अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ.आरके सिंह ने बताया कि मरीजों को तुरंत इलाज मिल सके, इसके लिए अस्पताल में क्विक रिस्पांस टीम का गठन किया गया है। यह टीम डॉक्टरों व मरीज दोनों पर नजर रखती है। टीम सभी मरीज के पास जाकर उनसे डॉक्टरों के आने व कैसा इलाज मिल रहा है आदि जानकारी एकत्र करती है। डॉक्टर अगर झूठ बोलते हैं तो मरीज से तत्काल फोनकर जानकारी ली जाती है। नए साल में यह टीम सभी अस्पतालों में होगी। 

छात्र-छात्राओं की सुविधा का भी ध्यान 

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज को 11 करोड़ रुपये सुरक्षा के तहत मिले हैं, जिससे कॉलेज प्रशासन मेडिकल कॉलेज व संबंद्ध पांचों अस्पतालों में बाउंड्रीवॉल, गेट आदि व्यवस्था करेगा। इसके साथ ही यूजी गर्ल्स हॉस्टल व बॉयज हॉस्टल का भी जीर्णोद्धार का कार्य हो रहा है। इसके साथ ही सभी छात्र-छात्राओं को हेल्थ कार्ड जारी किए गए हैं। कॉलेज के गुलाब गार्डन में मां सरस्वती पार्क बनेगा, जहां पर छात्र-छात्राएं योगा व ध्यान लगा सकते हैं।

सबसे ज्यादा सीटें हैं यहां 

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में 1100 से अधिक सीटें हैं, जो प्रदेश के किसी भी कॉलेज में नहीं है। अधिक सीटें होने की वजह से छात्र-छात्राएं अच्छे से अध्ययन करेंगे, जिसका फायदा सीधे मरीजों को होगा। वही, यहां पर तीन हजार से अधिक पद स्वीकृत हैं। इसके साथ ही स्मार्ट लेक्चर क्लास भी है।

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