Good News: उर्सला में जन्मजात बच्चों का दूर होगा बहरापन… सुनने लगेगा बच्चा तो बोलेगा भी

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर के उर्सला अस्पताल में जन्मजात बच्चों का दूर होगा बहरापन।

कानपुर के उर्सला अस्पताल में जन्मजात बच्चों का बहरापन दूर होगा। प्रदेश में सबसे पहले उर्सला को उपलब्ध होंगे कॉक्लियर इंप्लांट। पांच वर्ष तक के बच्चों को लगाई जाएगी कान की मशीन निशुल्क।

कानपुर, अमृत विचार। अगर आपका बच्चा पांच वर्ष से कम उम्र का है और वह सुन व बोल नहीं सकता है। ऐसे में परेशान होने की जरूरत नहीं है। अब इसका निदान कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी से संभव हो सकेगा। इस सर्जरी की सुविधा जल्द ही प्रदेश में सबसे पहले उर्सला अस्पताल में होगी। जिससे बच्चे का बहरापन तो दूर होगा ही, साथ ही वह बोल भी सकेगा। इस संबंध में सेंट्रल गर्वमेंट एडिक्स टीम उर्सला का निरीक्षण कर चुकी है। 

एक साल की उम्र तक भी आवाज देने पर बच्चा नहीं सुने तो ऐसे में सावधान हो जाना चाहिए। यह कानों से जुड़ी बीमारी की वजह हो सकती है। ऐसे बच्चों को समय रहते डॉक्टर को दिखना चाहिए। यह जन्मजात बीमारी हो सकती है। उर्सला अस्पताल के नाक, कान व गला विभाग की ओपीडी में प्रतिमाह औसतन 15 बच्चे ऐसे पहुंचते है, जो सुन और बोल नहीं सकते। यह जन्मजात दिव्यांग होते है, जिनको इलाज के लिए अभी उर्सला से निजी अस्पताल भेजा जाता है।

निजी अस्पतालों में जांच, इलाज व ऑपरेशन कराने पर संबंधित बच्चे के अभिभावकों का चार से पांच लाख रुपये का खर्च आता है। लेकिन नए साल में प्रदेश में जिला अस्पतालों में से सबसे पहले उर्सला अस्पताल में शून्य से लेकर पांच वर्ष तक के बच्चों का इलाज व ऑपरेशन हो सकेगा। ऑपरेशन के दौरान बच्चों के कान में कॉक्लियर इंप्लांट लगाया जाएगा, जिससे बाद उनमें सुनने और फिर बोलने की क्षमता विकसित होगी।

यह इंप्लांट लगने के बाद जन्मजात दिव्यांग बच्चे भी आम बच्चों की तरह ही जीवन व्यतित कर सकते है, उनको सुनने और बोलने में कोई दिक्कत भी नहीं होगी। इस संबंध में शुक्रवार को दिल्ली एम्स के डॉ.कक्कड़ और मुंबई की डॉ.अपर्णा नदूलकर ने उर्सला का ऑनलाइन निरीक्षण किया। इसके साथ ही दिल्ली एम्स की एक टीम ने उर्सला आकर नाक, कान व गला विभाग और ओटी की जांच की है। 

जनवरी में होगी बैठक, फरवरी में मिलेगी अनुमति 

उर्सला अस्पताल में नाक, कान व गला विशेषज्ञ डॉ. प्रवीन कुमार सक्सेना ने बताया कि करीब ढ़ाई साल से वह इस प्रोजेक्ट को उर्सला में लाने का प्रयास कर रहे थे, जो अब सफल होता दिख रहा है। कॉक्लियर इंप्लांट के संबंध में सेंट्रल गवर्मेंट एडिक्स टीम ने उर्सला का निरीक्षण किया है। अब इस संबंध में जनवरी माह में टीम के साथ बैठक होगी और फरवरी माह में कॉक्लियर इंप्लांट लगाने के संबंध में अनुमति मिल सकती है। यह इंप्लांट एडेप्स से मिलेंगे। उसके बाद उर्सला में सर्जरी कर यह कॉक्लियर इंप्लांट बच्चों को निशुल्क लगाया जाएगा।

ऐसे लगेगा कॉक्लियर इंप्लांट

कॉक्लियर इंप्लांट के तहत बच्चों के कान के आंतरिक हिस्से में सर्जरी कर मशीन लगाई जाएगी। इस इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिये बच्चा पहले सुनने और फिर बोलने लगेगा। यह डिवाइस माइक्रोफोन, स्पीच प्रोसेसर, ट्रांसमीटर, रिसीवर और इलेक्ट्रोड से बनी है। माइक्रोफोन आवाज को प्रोसेसर तक पहुंचाता है। यहां से आवाज फिल्टर होकर इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल के जरिये ट्रांसमीटर तक पहुंचती है। 

सुनने लगेगा बच्चा तो बोलेगा भी

डॉ.प्रवीन ने बताया कि जिन बच्चों को सुनाई नहीं पड़ता है, उनके सीटी स्कैन, एमआरआई से इस बात की जानकारी की जाती है कि आंतरिक हिस्से में कान का हिस्सा है या नहीं। कॉक्लियर का हिस्सा ठीक नहीं होता है तो ब्रेन की हड्डी में जगह बनाकर डिवाइस लगाई जाती है। इससे बच्चा सुनने लगता है। जब उसकी सुनने की क्षमता विकसित हो जाती है तो वह बोलने भी लगता है।

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