बरेली: खेत पर तार लगाकर करंट दौड़ाया, चार छुट्टा पशु मरे

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Edited By Amrit Vichar
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भमोरा के गांव धनौरा में घटना, पुलिस ने किसान के खिलाफ दर्ज की रिपोर्ट

बरेली/भमोरा, अमृत विचार। छुट्टा पशु किसानों के जी का जंजाल बन गए हैं। कुछ दिन पहले एक-दूसरे के खेतों में छुट्टा पशुओं को खदेड़ने पर हुए विवाद के बाद बिशारतगंज में एक किसान को पीटकर मार दिया गया था तो अब भमोरा इलाके में अपनी फसल को पशुओं से बचाने के लिए खेत पर तार लगाकर करंट छोड़ने से चार गोवंशीय पशुओं की मौत के बाद किसान पर एफआईआर दर्ज की गई है।

भमोरा के गांव धनौरा में रहने वाले किसान रवि पाठक का खेत गंगा किनारे कटरी में है। गांव के लोगों के मुताबिक इस इलाके में छुट्टा पशुओं के झुंड घूमते रहते हैं और जब भी मौका मिलता है खेतों में घुसकर फसलों को बर्बाद कर जाते हैं। रवि पाठक ने अपनी फसल बचाने के लिए खेत पर चारों तरफ तार की बाड़ बना दी थी और उसमें करंट दौड़ा दिया था। चार दिन पहले करंट की चपेट में आने से यहां दो गाय और दो सांड़ों की मौत हो गई।

आरोप है कि रवि पाठक ने मृत गोवंशीय पशुओं को जेसीबी से गड्ढा खोदकर दफन करा दिया। एक ग्रामीण की सूचना पर पहुंची चौकी पुलिस ने मौके पर जांच की तो घटना सही पाई गई। उच्चाधिकारियों को सूचना देने के बाद इंस्पेक्टर भमोरा परमेश्वरी के साथ सीओ आंवला नीलेश मिश्र घटनास्थल पर पहुंचे और मृत पशुओं के शव गड्ढे से निकलवाकर पोस्टमार्टम कराया। इसके बाद उन्हें दोबारा गंगा किनारे दफना दिया गया। अफसरों के निर्देश पर बल्लिया के चौकी इंचार्ज सत्येंद्र कुमार की ओर से थाना भमोरा में रवि पाठक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।

कड़ाके की ठंड में खेतों पर गुजर रही किसानों की रात
पूरे जिले में किसानों को छुट्टा पशुओं से अपनी फसलों को बचाना भारी पड़ रहा है। प्रशासन और पशु पालन विभाग के अफसर कई बार दावा कर चुके हैं कि जिले में छुट्टा पशुओं की संख्या नाममात्र की रह गई है लेकिन असलियत यह है कि भीषण ठंड में किसानों को रात-रात भर जागकर खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। इसके बावजूद वे अपनी फसलों को नहीं बचा पा रहे हैं। छुट्टा पशुओं को खदेड़ने की वजह से खुद किसानों के बीच भी लड़ाई-झगड़े लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

फिर सिर्फ किसान पर रिपोर्ट क्यों...
एक तरफ बार-बार किसान छुट्टा पशुओं से निजात दिलाने की फरियाद करते हैं तो दूसरी तरफ प्रशासन के अफसर और जनप्रतिनिधियों की ओर से दावा किया जाता है कि अब छुट्टा पशु नहीं हैं। पशुपालक ही अपनी गायों को दूध निकालने के बाद खुला छोड़ देते हैं। सवाल उठ रहा है कि किसी पशुपालक ने ही अपनी गायों को खुला छोड़ दिया था तो सिर्फ किसान पर रिपोर्ट दर्ज क्यों की गई। पशुपालक को इसमें नामजद क्यों नहीं किया गया।

एक ग्रामीण की सूचना पर पुलिस ने घटना की जांच की। सूचना सही पाए जाने के बाद हल्के के दरोगा की तहरीर पर पुलिस ने किसान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है - नीलेश मिश्र, सीओ आंवला।

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