एक और कामयाबी

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Edited By Amrit Vichar
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चंद्र और सूर्य मिशन के बाद नए साल के पहले दिन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने पहले एक्स-रे पोलरिमीटर उपग्रह (एक्सपोसैट) का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। इसरो का यह मिशन ब्लैक होल जैसे आकाशीय पिंडों के रहस्यों का अध्ययन करेगा। सैटेलाइट का लक्ष्य तीव्र एक्स-रे स्रोतों के ध्रुवीकरण की जांच करना है। खास बात है कि इस मिशन को इसरो ने अपने सबसे भरोसेमंद ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) से लांच किया।

महत्वपूर्ण है कि पीएसएलवी से अंतरिक्ष में ले जाने वाले पेलोड में से एक को महिलाओं ने बनाया है। यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण को दिखाता है और सभी पेलोड भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में हो रहे सुधारों को दिखाते हैं। इसरो के अनुसार भारत में अंतरिक्ष-आधारित एक्स-रे खगोल विज्ञान स्थापित किया गया है, जो मुख्य रूप से इमेजिंग, टाइम-डोमेन अध्ययन और स्पेक्ट्रोस्कोपी पर ध्यान केंद्रित करता है, आगामी एक्सपोसैट मिशन एक प्रमुख मूल्यवर्धन का प्रतीक है। यह शोध, पारंपरिक समय और आवृत्ति डोमेन अध्ययनों को पूरक करते हुए, एक्स-रे खगोल विज्ञान में एक नया आयाम पेश करता है, जो वैज्ञानिक समुदाय के भीतर प्रत्याशा और उत्साह पैदा करता है।

ऐसा अध्ययन करने के लिए यह इसरो का पहला समर्पित वैज्ञानिक उपग्रह है। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने दिसंबर 2021 में सुपरनोवा विस्फोट के अवशेषों, ब्लैक होल से निकलने वाले कणों की धाराओं और अन्य खगोलीय घटनाओं का ऐसा ही अध्ययन किया था। वास्तव में यह मिशन खगोलीय स्रोतों से ब्रह्मांडीय एक्सरे के ध्रुवीकरण का अध्ययन करने संबंधी भारत के पहले समर्पित वैज्ञानिक प्रयास को दर्शाता है। इसरो की इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह प्रक्षेपण अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए अद्भुत खबर है और इस क्षेत्र में भारत के कौशल को बढ़ाएगा। 

ध्यान रहे इस प्रक्षेपण के बाद भारत ब्लैक होल और न्यूट्रॉन नक्षत्रों के अध्ययन के लिए विशिष्ट खगोल शास्त्रीय वेधशाला भेजने वाला दूसरा देश बन गया है। जब पूरी दुनिया में एक्स-रे ध्रुवीकरण को जानने का महत्व बढ़ा है। यह पिंड या संरचनाएं ब्लैक होल, न्यूट्रॉन तारे (तारे में विस्फोट के बाद उसके बचे अत्यधिक द्रव्यमान वाले हिस्से), आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद नाभिक आदि को समझने में मदद करता है। इससे आकाशीय पिंडों के आकार और विकिरण बनाने की प्रक्रिया को समझने में मदद मिलेगी। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने इसे देश के लिए प्रेरणा बताया है। फिलहाल आशा है कि एक्सपोसैट दुनियाभर के खगोल विज्ञान समुदाय को काफी लाभ पहुंचाएगा।