शाहजहांपुर: यहां 103 एकड़ जमीन पर कब्जा करने के बाद फैक्ट्री प्रबंधन हो गया लापता
जमीन लेने के दस साल बाद भी नहीं लग सकी फैक्ट्री, कैमुना ग्रुप की ओर से जलालाबाद क्षेत्र में लगाई जानी है शुगर फैक्ट्री
शाहजहांपुर, अमृत विचार। कैमुना ग्रुप शुगर फैक्ट्री लगाने के लिए 103 एकड़ जमीन पर कब्जा करने के बाद लापता हो गया है। दस साल बाद भी फैक्ट्री नहीं लग सकी है। जबकि लोग विकास की राह तक रहे हैं। युवाओं की आंखों में आज भी रोजगार के सपने पल रहे हैं। किसान उपज के बेहतर दाम पाने की आस लगाए हैं। फैक्ट्री लगने से जिले की आर्थिकी में भी सुधार आएगा।
क्षेत्र के किसानों के लिए ड्रीम प्रोजेक्ट कैमुना शुगर मिल को साल 2013 में उत्तर प्रदेश सरकार ने मंजूरी दी थी। गांव दहेना में फैक्ट्री लगना तय हुआ। मंजूरी के बाद किसानों के चेहरे पर खुशी देखने को मिली। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार साल 2014 में शुगर मिल के लिए भूमि अधिग्रहण किया गया था। इसके बाद भूमि पूजन हुआ था और 2016 तक 33 परिवारों को उनकी सुविधा के अनुसार मकान दिलाकर मिल के लिए कुल 103 एकड़ भूमि अधिग्रहीत की गई। 100 कर्मचारियों के लिए आवासों का निर्माण किया जा चुका है।
साल 2017 तक मिल निर्माण पूरा कर 2018 में पेराई शुरू होना था, लेकिन वित्तीय प्रबंधन न हो पाने के कारण 600 करोड़ का प्रोजेक्ट अधर ने लटक गया था, कुछ समय बाद वित्तीय प्रबंध भी हो गया। मिल में मशीनरी के लिए कैमुना ने नोएडा की उत्तम शुक्रोटेक इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से करार किया। इसके अलावा कुछ विदेशी मशीनें भी लगाई जानी थी।
2019 के अंत तक मशीनरी लगाकर 2020 में गन्ना पेराई कार्य शुरू कर दिया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अधिकारियों के अनुसार मिल इतनी अत्याधुनिक व हाईटेक होगी कि इसमें प्रतिदिन 600 मीट्रिक टन गन्ने की पेराई के साथ 60 मेगावाट बिजली और 60 हजार लीटर एथेनॉल बनाया जाएगा।
मिल में प्रभावी उपचार संयंत्र की भी व्यवस्था की जानी है, जिससे कि प्रदूषित पानी को रिसाइकल किया जा सके और दोबारा से प्रयोग में लाया जा सके। ऐसे में डिस्चार्ज की समस्या समाप्त हो जाएगी और मिल के कारण वातावरण पर कोई भी नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
गन्ने से भरे वाहनों को खड़ा करने के लिए मिल में ही 450 मीटर का 4-5 लेन का रोड बनाया जाना है ताकि मुख्य मार्ग के ट्रैफिक पर कोई असर न पड़े। एक वाहन को मिल में प्रवेश के बाद अधिकतम 20 मिनट के समय में ही गन्ना तौल के बाद वापस भेज दिया जाएगा। यह फैक्ट्री अत्याधुनिक सुविधाओं से संपन्न होने वाली थी, लेकिन बीते दस साल से यह सिर्फ सपना सा प्रतीत हो रही है।
होना था प्रतिदिन 60 हजार लीटर एथेनॉल का उत्पादन
मिलों से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि विश्व भर में इस समय एथेनॉल की भारी मांग है। भविष्य के ईंधन के रूप में इथेनॉल को देखा जा रहा और इस मिल से रोज करीब 60, 000 लीटर एथेनॉल का उत्पादन होगा, जो किसी वरदान से कम नहीं होगा। जिससे क्षेत्र का काफी विकास होगा। सीमावर्ती जिले फर्रुखाबाद, हरदोई, बदायूं को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा और जिले में पहले से चल रही चीनी मिलों पर काम का और किसानों पर खर्च का बोझ कम होगा।
शुगर फैक्ट्री क्यों नहीं लग पा रहा है इस संबंध में हमे जानकारी नहीं है। अभी तक हमसे लाइसेंस के लिए कैमुना ग्रुप की ओर से किसी ने संपर्क नहीं किया है। - राजेश वर्मा, सहायक आयुक्त गन्ना।
जलालाबाद में कोई फैक्ट्री लगाई जानी थी, लेकिन क्यों नहीं लग सकी इसकी जानकारी नहीं है। अभी तक फैक्ट्री प्रबंधन से किसी ने मुझसे संपर्क नहीं किया है। - जितेंद्र कुमार मिश्र, जिला गन्ना अधिकारी।
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