जुर्माने के लिए आरोपी की आपराधिक वृत्ति सिद्ध होना जरुरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कर चोरी के एक मामले में कर विभाग द्वारा लगाए गए जुर्माने को खारिज करते हुए कहा कि कर चोरी के लिए आपराधिक कारण की उपस्थिति जुर्माना लगाने के लिए एक आवश्यक शर्त है। चोरी का इरादा साबित करने के लिए किसी अतिरिक्त सामग्री के बिना केवल ई-वे बिल में टाइपोग्राफिकल त्रुटि होने पर जुर्माना नहीं लगाना चाहिए।जुर्माने के लिए आरोपी की आपराधिक वृत्ति सिद्ध होना आवश्यक है।
उक्त टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ की एकलपीठ ने मेसर्स हिंदुस्तान हर्बल कॉस्मेटिक्स के खिलाफ विवादित आदेशों को रद्द करते हुए आगामी चार सप्ताह के भीतर याची को राहत देने का निर्देश दिया है। तथ्यों के अनुसार याची माल और सेवा कर अधिनियम,2017 के तहत सौंदर्य प्रसाधनों का पंजीकृत डीलर है।
याची के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि माल की खेप लेकर याची का वाहन 23.5.2018 को झारखंड जा रहा था, तभी माल और सेवा कर अधिकारियों वाहन को रोक लिया और सभी दस्तावेज होने के बाद भी केवल ई-वे बिल में वाहन संख्या गलत होने का हवाला देते हुए जब्त कर लिया।
संबंधित अधिकारियों ने केवल इस आधार पर जुर्माना लगा दिया कि वाहन संख्या 5332 को गलती से 3552 के रूप में टाइप कर दिया गया था। याची के अधिवक्ता का तर्क था कि यह स्पष्ट रूप से टाइपोग्राफिकल त्रुटि है, इस पर जुर्माना लगाना मनमाना है।
सरकारी अधिवक्ता ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि विभाग ने एक परिपत्र के माध्यम से उन मामलों में पहले ही जुर्माना नहीं लगाने की अनुमति दी है, जहां वाहन संख्या में दो अंकों की गलती है जबकि वर्तमान मामले में दो अंकों के बजाय तीन अंकों का अंतर है।
अंत में कोर्ट ने कहा कि जहां डीलरों की बड़ी चूक से कर चोरी का इरादा साबित होता है, वहां जुर्माना लगाना उचित है, लेकिन हर मामले में ऐसा नहीं होता है। मौजूदा मामले में ई-वे बिल में टाइपोग्राफिकल त्रुटि के आधार पर जुर्माना लगाना अवैध और गैरकानूनी है।
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