Fatehpur: सीएचसी की दयनीय स्थिति, फार्मासिस्ट भरोसे अस्पताल, डॉक्टरों की लेटलतीफी और भटकते मरीज...
फतेहपुर में सीएचसी में डॉक्टरों की लेटलतीफी जारी है।
फतेहपुर में दोआबा के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के स्थिति दयनीय हो चुकी है। अस्पतालों के शौचालय गंदगी से पटे हैं। समय से अस्पतालों में डाक्टरों के न पहुंचने से मरीज घंटों तक इधर-उधर भटक रहे हैं।
फतेहपुर, अमृत विचार। दोआबा के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के स्थिति दयनीय हो चुकी है। अस्पतालों के शौचालय गंदगी से पटे हैं। समय से अस्पतालों में डाक्टरों के न पहुंचने से मरीज घंटों तक इधर-उधर भटक रहे हैं। अस्पताल परिसर में गंदगी और आवारा पशुओं का आवागमन बना हुआ है। डाक्टरों की लेटलतीफी के चलते मरीजों को दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। शनिवार को अमृत विचार की पड़ताल में कुछ ऐसे ही हालात सामने आए।
फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा था इलाज
सीएचसी अमौली में पड़ताल के दौरान सामने आया कि यहां एक फार्मासिस्ट ही इमरजेंसी वार्ड में दिखे। उन पर अकेले ही मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी दिखी। स्थिति यह है कि अस्पताल पहुंचे मरीज महेश कुमार ने बताया कि वह सुबह से पर्चा बनवाने के लिए परेशान था। ओपीडी व इमरजेंसी सेवाएं सिर्फ एक ही डाक्टर के हवाले हैं। इसे जैसे तैसे निपटाया जा रहा है। वहीं डिलेवरी के लिए आई महिला के पिता अब्दुल मजीद ने बताया कि दो घंटे से बेटी कराह रही है लेकिन किसी भी डाक्टर ने उसे छुआ तक नहीं।

प्रभारी ने माना, कुछ दवाएं बाहर की लिखी जा रहीं
सरांय खालिश में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में पड़ताल के दौरान डॉ आशीष कुमार ने बताया कि इस समय सर्दी, जुकाम, सांस फूलना, सर्दी लगने वाले मरीज ज्यादा पहुंच रहे हैं। पिछले कुछ दिनों तक रोजाना दिन 50 से 60 से मरीज देखे जा रहे थे। मौजूदा समय में सर्दी अत्यधिक हो जाने से मरीजों की संख्या 10 से 20 ही बची है। दवाओं में सभी दवाएं उपलब्ध हैं। कुछ दवाएं नहीं उपलब्ध रहती हैं, जो जरूरत पड़ने पर बाहर से मरीजों को लिखनी पड़ती है। पड़ताल के दौरान पूरा स्टाफ मौजूद मिला।
बिन्दकी में दुरुस्त मिलीं व्यवस्थाएं
कोरोना काल के बाद अस्पताल की व्यवस्थाएं पूरी तरह से बदल चुकी हैं। इसके बाद से अस्पताल की सुविधाएं हों या दवाओं और डाक्टरों की उपलब्धता सब ठीक चल रही हैं। यहां जरूरी दवाओं के साथ सारे संसाधन जुटाए जा चुके हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य केंद्र परिसर में ही 24 घंटे प्रसव की सुविधा भी है। हालांकि अस्पताल परिसर में साफ सफाई के मामले में कई बार अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान निर्देश भी दिए लेकिन इसका असर नहीं दिख रहा है।
बाहर की जांच और दवाओं में पिस रहे मरीज
सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र हरदों में मरीज को इलाज से पहले जांचें बाहर से करानी पड़ रही हैं और इलाज के बाद दवाएं बाहर से लेनी पड़ रही हैं। स्वास्थ्य केन्द्र में रखा हेल्थ एटीएम चालू हालत में था, इससे अब तक सैकड़ों मरीज जांच करा चुके हैं। परिसर में जगह-जगह पसरी गंदगी भी अस्पताल की पोल खोल रही है। अस्पताल में रोजाना करीब 80-90 मरीजों की ओपीडी हो रही है।
जनपद के सभी चिकित्साधिकारियों और डाक्टरों को समय से अस्पताल पहुंचने और ओपीडी में बैठने के निर्देश हैं। बावजूद अगर ऐसा नहीं हो रहा है तो जांच के बाद सम्बन्धित पर कार्यवाही की जाएगी। - डा. इस्तियाक अहमद, एसीएमओ
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