बरेली: होटल पर लगाते रहे आवासीय टैक्स, जीआईएस सर्वे में खुली पोल

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Edited By Amrit Vichar
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भवन की नाप हुई तो वार्षिक टैक्स 35 हजार से दो लाख से अधिक पहुंचा

बरेली, अमृत विचार। गली में अतिक्रमण कर चार मंजिला होटल संचालित होता रहा और निगम का टैक्स विभाग होटल को घर ही मानता रहा। घर के रूप में ही टैक्स लगाता रहा। नगर निगम के टैक्स विभाग के अफसरों की यह मेहरबानी कई वर्षों से चलती आ रही थी, लेकिन पुराने अफसरों के कुर्सी से हटने के बाद जीआईएस सर्वे के तहत भवन की वास्तविक नाप की गई तो पोल खुल गई, जो बिल 35 हजार का था, वह दो लाख वार्षिक से ज्यादा का निकला।

जोन- 2 के दर्जी चौक इलाके में लगभग 1000 वर्ग फिट के बेसमेंट हाल वाले भवन में चार मंजिला होटल संचालित है। निगम ने इस भवन के मालिक पर दरियादिली दिखाते हुए आवासीय टैक्स लगाया, जो 35 हजार रुपये वार्षिक था। नगर निगम के टैक्स विभाग के तत्कालीन कर निर्धारण अधिकारी की मेहरबानी का असर था कि होटल पर कम टैक्स लगने की जानकारी देने के बाद भी उस पर ध्यान नहीं दिया गया।

बड़ा बाजार निवासी आशीष अग्रवाल ने निगम के अफसरों की इस मेहरबानी की पोल खोलने के लिए लगातार 14 साल से पत्राचार जारी रखा। आशीष बताते हैं कि नगर आयुक्त निधि गुप्ता वत्स ने टैक्स विभाग से एक कर निर्धारण अधिकारी को टैक्स के मामलों से दूर किया, तब सच्चाई सामने आने की उम्मीद जागी।

पिछले वर्ष अमृत विचार ने 5 अगस्त को इस मामले का खुलासा किया था। तब नगर आयुक्त ने मुख्य कर निर्धारण अधिकारी को मामले की जांच को कहा था। चार माह तक चली जांच के बाद अब नगर निगम के टैक्स विभाग ने जीआईएस सर्वे के बाद संपत्ति संख्या 55\56 की जो स्थिति पाई, उसके अनुसार बिल भेजा है। उसके अनुसार भवन का वार्षिक टैक्स 2 लाख 32 हजार 27 रुपये आया है।

निगम ने भवन की वास्तविक गणना करते हुए कहा है कि 12 मीटर चौड़ी सड़क के किनारे बने भवन का आच्छादित क्षेत्रफल 16 हजार 494 वर्ग मीटर है। प्रवर कर अधीक्षक, राजस्व निरीक्षक और जीआईएस सर्वेकर्ता के हस्ताक्षर से जारी बिल में निगम ने भवन मालिक को यह भी सुविधा दी है कि यदि उन्हें उक्त बिल में किसी तरह की कोई आपत्ति है तो उस आपत्ति के साक्ष्य सहित उपलब्ध करा दें।

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