पशुओं की आरामगाह और जुआरियों का अड्डा बना मलिक मोहम्मद जायसी शोध संस्थान, हाल देखने तक नहीं आते हैं जिम्मेदार  

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पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी ने 23 नवम्बर  1988 को निर्माण के लिए रखी थी आधारशिला

लक्ष्मण प्रसाद वर्मा/ अमेठी,  अमृत विचार। महाकवि मलिक मोहम्मद जायसी के नाम पर बना मलिक मोहम्मद जायसी शोध संस्थान जिम्मेदारों की उपेक्षा के चलते घोड़ों का अस्तबल बन गया है। संस्थान का परिसर मवेशियों के लिए चारागाह बना हुआ है। शाम ढलते ही जुआरी और शराबियों के लिए सुरक्षित अड्डा बन जाता है। संस्थान का निर्माण जिस उद्देश्य से हुआ था। उसे छोड़कर यहां सब कुछ होता है।

महाकवि मलिक मोहम्मद जायसी की याद को संजोने के लिए 1988-89 में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी ने नगर के मुहल्ला कंचाना स्थित उनके पैतृक आवास पर मलिक मोहम्मद जायसी स्मारक और कोतवाली के करीब रायबरेली सुलतानपुर नेशनल हाईवे के किनारे मलिक मोहम्मद जायसी शोध संस्थान का निर्माण कराया था। बाद में नगर पालिका ने जायसी स्मारक की बाउंड्री बनवाकर उसके चारों ओर गेट लगवा दिया था। वहीं, राहुल गांधी ने सांसद रहते हुए अपनी निधि से मलिक मोहम्मद जायसी शोध संस्थान का सुंदरीकरण व बाउंड्री वॉल सहित मुख्य द्वार बनवाया था। लेकिन, देखरेख के अभाव में जायसी स्मारक व शोध संस्थान दोनों की दशा खराब है। जायसी स्मारक के गेट टूटे पड़े हैं तो जायसी की याद में बनवाया गया आधा स्तंभ बिल्कुल जर्जर अवस्था में है। वहीं, शोध संस्थान में टैंपो से लेकर घोड़े और खच्चरों ठिकाना बनकर रह गया है। गेट खुला रहने से अराजक तत्वों ने भी इसे अपना सुरक्षित अड्डा बना लिया है।


पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी ने रखी थी आधारशिला
महाकवि मलिक मोहम्मद जायसी की जन्म स्थली पर इस स्थल के निर्माण की आधार शिला 23 नवंबर 1988 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा रखी गई थी। शोध संस्थान के गेट का निर्माण 2018 में अमेठी के सांसद रहे राहुल गांधी ने कराया था। जिसकी लागत लगभग 38 लाख आई थी। उसके बाद से शोध संस्थान को देखने वाला कोई नहीं मिला। सरकार द्वारा लगातार उपेक्षा से शोध संस्थान आरामगाह बन गया है। केयर टेकर व अन्य किसी भी प्रकार की सुविधाएं इस स्थल पर नहीं रहीं। यही वजह है कि जिस मकसद से शोध संस्थान का निर्माण हुआ था, वह तो पूरा नहीं हुआ बल्कि कस्बे वासियों के लिए मांगलिक कार्यक्रम करने का आसान जरिया जरूर बन गया है। लंबे अरसे बाद अब प्रदेश सरकार की मंशा को समझते हुए पर्यटन विभाग द्वारा इस स्थल के हालात सुधारने के लिए 1 करोड़ 19 लाख का डीपीआर भेजा गया था। जिसकी स्वीकृत हुई या नहीं व भविष्य के गर्भ में है। स्वीकृत मिलने के बाद शोध संस्थान व जन्म स्थली को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाना था।

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जन्मस्थली और शोध संस्थान में व्यवस्थाएं तो कुछ भी नहीं रही हैं, जो महाकवि के अपमान जैसा है, अब यहां हालात सुधरने की उम्मीद नहीं दिख रही है, प्रशासन और नगरपालिका की तरफ से इंटरलॉकिंग का कार्य साल 2013 में हुआ था, तब से अभी तक रंग रोगन का कार्य तक नहीं हुआ।
-मो. वसीम उर्फ लल्ला किंग

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मलिक मोहम्मद जायसी की जन्म स्थली व शोध संस्थान का व्यवस्थित रूप से सुंदरीकरण होना चाहिए, प्रशासन और शासन इसका सौंदर्यीकरण कराए, शोध संस्थान में पुस्तकालय बने, मलिक मोहम्मद जायसी शोध संस्थान तो है लेकिन वहां पुस्तक नाम की कोई चीज नहीं है। -महेश कुमार मौर्य समाजसेवी

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सरकार ने सूफी संत कवि मलिक मोहम्मद जायसी की यादगार में उनकी जन्म स्थली को पर्यटन स्थल बनाने के लिए रूप रेखा तैयार कर लिया है, हाल ही के दिनों में मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने कमिश्नर गौरव दयाल और जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ जन्म स्थली पहुंचकर मौके का मुआयना कर लिया था, जल्द ही बजट जारी होते ही पर्यटन स्थल बनाने का काम शुरू हो जाएगा।
-रमेश कुमार सिंह भाजपा नेता व पूर्व ब्लाक प्रमुख

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मलिक मोहम्मद जायसी की याद में शोध संस्थान व जन्म स्थली को पर्यटन स्थल बनाने के लिए सरकार शुरू से ही सजग रही है, जल्द ही दिन बहुरने वाले है, पर्यटन स्थल बनाने के लिए कार्ययोजना तैयार हो गई है, सरकार पर्यटन स्थल बनाने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू कर सकती है। -राम सिंह

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