जी-9 केला किसानों के लिए बना लक्ष्मी का वरदान, रायबरेली में बन रही Banana belt

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किसान एक एकड़ में केला की खेती से कमा रहे 2 से 2.50 लाख रुपये 

आशीष दीक्षित/अंगद राही, रायबरेली, अमृत विचार। रायबरेली की मिट्टी केला की खेती के सबसे उपयुक्त है यही कारण जिले में केला बेल्ट बनाई जा रही है। किसानों के लिए केला से अच्छी कोई नकदी फसल नहीं है। कम समय और कम लागत में दो से तीन गुना मुनाफा किसानों को मिल रही है। किसानों के लिए जी-9 केला की प्रजाति ने लक्ष्मी का दरवाजा खोल दिया है। किसान परंपारगत खेती से इतर केला की बागवानी पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।इसकी बागवानी में मौसम की प्रतिकूलता का असर भी कम नहीं है। साथ ही जी-8 प्रजाति के केला में पूरी गैहर में केला आता है जिससे किसान को बहुत अधिक मुनाफा होता है। 

शिवगढ़ क्षेत्र के कुम्हरावां,पहाड़पुर,रीवां के किसानों को केला की खेती खूब रास आ रही है। कृषक एक एकड़ में केला की खेती करके 2 से ढाई लाख रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। वहीं केला की खेती को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग किसानों को लागत का 40 प्रतिशत अनुदान दे रहा है। कुम्हरावां के प्रगतिशील कृषक राम सुमिरन मौर्या,पहाड़पुर के रहने वाले अरुण बाजपेई,सुखेन्द्र अवस्थी,शैलेन्द्र अवस्थी आदि किसान केला की खेती से एक एकड़ में 2 से 2.50 लाख रुपए मुनाफा कमा रहे हैं।पिछले 7 वर्षों से निरन्तर केला की खेती करते चले आ रहे रामसुमिरन मौर्या ने बताया कि 7 साल पहले नाबार्ड से आए कुछ लोगों ने उन्हें केला की खेती करने के लिए प्रेरित किया था और अपने खर्चे से पूना, उत्तराखण्ड कृषि विश्वविद्यालय ले जाकर प्रशिक्षण दिलाया था। जिसके पश्चात पहली बार बाराबंकी से टिशू कल्चर के जी-9 किस्म के पौधे लाकर केला की खेती की शुरुआत की थी। जिसके बाद से लखनऊ से टिशू कल्चर के जी-9 किस्म के पौधे लाकर खेती करते हैं जिनका मानना है कि उत्तर प्रदेश के लिए यही किस्म सबसे सर्वोत्तम है। केला की उन्नतशील खेती के लिए रामसुमिरन मौर्या नाबार्ड द्वारा सम्मानित भी किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि केला की खेती के लिए इससे पूर्व नाबार्ड से अनुदान मिला था इस बार उद्यान विभाग द्वारा अनुदान मिला है। 

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केला की ‍खेती के लाभ
रामसुमिरन मौर्या ने बताया कि केला की खेती के कई फायदे है पहला लाभ 1 एकड़ में 50 से 60 हजार रुपए की लागत लगाकर 2 से 2.50 लाख रुपए तक मुनाफा मिल जाता है। दूसरा लाभ खेत से ही फसल बिक जाती है बिक्री में कोई दिक्कत नही होती। उन्होंने बताया कि केला की खेती के अलावा वे सब्जियों और अनाजों की खेती करते हैं लेकिन केला खेती में कम लागत,कम मेहनत में एक साथ लाखों का मुनाफा मिल जाता है। उन्होंने बताया कि जुलाई माह में पौधों की रोपाई की जाती है और सितम्बर, अक्टूबर में फसल तैयार हो जाती है।

केला की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु एवं भूमि
उद्यान निरीक्षक वीरेश कुमार ने बताया कि केला की खेती कई तरह की भूमि में की जा सकती है बशर्ते उस भूमि में पर्याप्त उर्वरता शक्ति नमी व जल निकास की अच्छी व्यवस्था होना चाहिए। केला की खेती के लिए गर्मतर एवं सम जलवायु उत्तम मानी गई है। अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में केला की खेती सफल रहती है। इसके लिए जीवांशयुक्त दोमट एवं मटियार मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है। केला की उन्नतशील खेती के लिए 5 से 7.5 पीएच मान वाली भूमि उपयुक्त मानी गई है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए सबसे अच्छी है जी 9 किस्म
केला की खेती करने वाले किसानों की माने तो पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए टिशू कल्चर की जी9 किस्म सबसे सर्वोत्तम किस्म है, यह किस्म अधिक पैदावार देने के साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली किस्म है। टिशू कल्चर की जी9 किस्म के पौधे बाराबंकी और लखनऊ में आसानी से मिल जाते हैं।

एक बार रोपाई कर 2 बार ली जाती है फसल
केला की खेती का सबसे अच्छा फायदा है यह है कि पहले साल लगाए गए पौधों से उन्नतशील फसल मिल जाती है। दूसरे गैहर काटने के बाद पुराने पौधे नष्ट कर दिए जाते हैं, दूसरे साल कल्लों से फसल तैयार हो जाती है, जिससे दूसरे साल लागत कम हो जाती हैं। हांलाकि दूसरे साल पहले साल की अपेक्षा कम उत्पादन होता है।

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उद्यान विभाग दे रहा केला की खेती को बढ़ावा
प्रदेश की योगी सरकार में उद्यान विभाग केला की खेती खूब बढ़ावा दे रही है। शिवगढ़ उद्यान निरीक्षक वीरेश कुमार ने बताया कि यह 14 माह की फसल होती है एक हेक्टेयर में कुल 3086 पौधे लगाये जाते हैं। जिसमें लागत का कुल 40 अनुदान लगभग (45000 रुपए) उद्यान विभाग द्वारा दिया जाता है। पहले वर्ष अनुदान का 75 प्रतिशत और दूसरे वर्ष पौधों के रखरखाव के लिए 25 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। एक बार पौधों की रोपाई करके 2 बार फसल ली जा सकती है। दूसरी बार पुराने पौधे नष्ट कर दिए जाते हैं कल्लों के रूप में निकले नए पौधे तैयार हो जाते हैं। पहले वर्ष 35 से 45 किलो की गैहर आती है और दूसरे वर्ष 25 से 35 किलो की गैहर आती है। एक हेक्टेयर में किसान भाई लागत निकालकर आसानी से 7 से 8 लाख रुपए का मुनाफा कमा लेते हैं। कीमत अच्छी मिलने पर इससे भी ज्यादा मुनाफा मिल सकता है। इच्छुक कृषक इस महत्वाकांक्षी योजना का तुरन्त लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने बताया कि ज्यादा जानकारी के लिए कृषक उनके मोबाइल नंबर 9450846622 पर काल करके पूरी जानकारी लेकर योजना का लाभ उठा सकते हैं। बताया कि जिले में केला की बागवानी के लिए शिवगढ़, लालगंज, सतांव, गुरुबक्शगंज, गौरा में केला बेल्ट बनाने के लिए योजना बन रही है।

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