पीलीभीत: कैसे जीतेंगे कुपोषण से जंग?, 10 कंधों पर 70 सुपरवाइजरों की जिम्मेदारी

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

पीलीभीत, अमृत विचार: बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के पास जनपद के कुपोषित बच्चों को कुपोषण से निजात दिलाने की जिम्मेदारी है। मगर, यह विभाग लंबे अरसे से खुद ही कुपोषण का शिकार बना हुआ है। विभाग में स्टाफ की खासी कमी है।

आलम यह है कि 70 सुपरवाइजरों की जगह मात्र 10 कंधों पर पूPilibhit News, Uttar Pradesh News, Crime Newsरे जिले की जिम्मेदारी दी गई है। अब आधे-अधूरे स्टाफ के सहारे इन हालातों में कुपोषण की जंग कैसे लड़ी जाएगी, इसका जवाब तो विभाग के पास भी नहीं है। फिलहाल विभाग सीमित स्टाफ के सहारे ही केंद्रों के संचालन का दावा कर रहा है।

सरकार द्वारा कुपोषण की रोकथाम को लेकर कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। आंगनबाडी केंद्रों को अपग्रेड किया गया है। इसको लेकर करोड़ों रुपये खर्च भी हो चुके हैं और लगातार बजट भी भेजा जा रहा है। इससे जिले में कुपोषण पर रोक भी लगी है, लेकिन जिस हिसाब से कुपोषण पर अंकुश लगना चाहिए, उसके मुताबिक इस दिशा में कार्य नहीं हो पा रहा है। इसकी वजह विभाग में स्टाफ की बड़े पैमाने पर कमी है। जिले में 1960 आंगनबाडी केंद्र संचालित हैं।

इन आंगनबाड़ी केंद्रों की मॉनीटरिग के लिए के लिए जिले में 70 सुपरवाइजरों के पद स्वीकृत है, लेकिन जिले में मात्र 10 सुपरवाइजरों से ही काम चलाया जा रहा है। शेष 60 पद रिक्त चल रहे हैं। मानक के अनुसार एक सुपरवाइजर की निगरानी में अधिकतम 25 केंद्र होने चाहिए, लेकिन यहां तो एक-एक सुपरवाइजर पर कई गुना अधिक केंद्रों की जिम्मेदारी है।

आठ सीडीपीओ की जगह मात्र चार ही तैनात
जिले में बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) के आठ पद स़ृजित हैं, मगर यहां मात्र चार सीडीपीओ से ही काम चलाया जा रहा है। वर्तमान में मात्र विकास खंड अमरिया, मरौरी और पूरनपुर में ही सीडीपीओ तैनात है। नियमानुसार प्रत्येक विकासखंड स्तर पर एक सीडीपीओ की तैनाती होनी चाहिए। मगर, जिले में सीडीपीओ की खासी कमी चली आ रही है। विभाग का अन्य स्टाफ भी लगातार कम होता जा रहा है।

काम से अधिकता से लक्ष्य से भटकी सुपरवाइजर
सुपरवाइजर का मुख्य कार्य आंगनबाड़ी केंद्रों पर मॉनीटरिंग का है। इन सुपरवाइजरों को बारी-बारी से केंद्र पर मौजूद रहकर पुष्टाहार बंटवाना, सभी केंद्रों की रिपोर्ट तैयार करना आदि जिम्मेदारियां होती है। वहीं स्टाफ की कमी के चलते मानक से अधिक केंद्रों की जिम्मेदारी देने से अधिकांश सुपरवाइजर अपने काम से ही भटक गई हैं।

आंकड़े एक नजर में-
- जिले में आंगनबाड़ी केंद्र-1960
- लाभार्थी बच्चों की संख्या-2,27,575
- सीडीपीओ-04
- सुपरवाइजर-10

विभाग में स्टाफ की कमी पूर्व से ही चली आ रही है। स्टाफ कम होने से काम तो प्रभावित हो रहा है, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था कर कम स्टाफ से ही बेहतर कार्य करने का प्रयास किया जा रहा है--- युगल किशोर सांगुड़ी, जिला कार्यक्रम अधिकारी।

यह भी पढ़ें- पीलीभीत: संघर्ष को ऐतिहासिक बनता देख गौरवान्वित हुए कारसेवक और उनके परिवार

संबंधित समाचार