राम जन्मभूमि का ताला खुलवाया उसे ही भूल गए
अयोध्या:अमृत विचार। आगामी 22 जनवरी को नवनिर्मित राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है। एक समय था जब रामलला ताले में कैद थे, उस ताले से रामलला को मुक्त कराने के लिए जिसने प्रथम प्रयास किया, और जिसे कामयाबी मिली उस उमेश चंद पांडेय एडवोकेट को ही राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट भूल गया है। 22 जनवरी का निमंत्रण उन्हें भी नहीं मिला। श्री पांडे ने तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को इस संबंध में लिखा भी है।
उमेश चंद पांडे एडवोकेट सन 86 में फैजाबाद में वकालत करते थे। उस समय राम "जन्मभूमि का ताला खोलो" आंदोलन विहिप व श्रीराम जन्मभूमि न्यास चला रहा था। महंत रामचंद्र दास परमहंस ने आत्मदाह की घोषणा तक की थी।
उमेश चंद्र पांडे ने तब इस पुराने मामले की कानूनी तहकीकात करने के बाद मुंसिफ सदर के यहां एक आवेदन किया की राम जन्मभूमि में ताला बंद करने का कोई सरकारी आदेश नहीं है और यह ताला खोला जाए। मुंसिफ सदर के यहां से उनका आवेदन स्वीकार न होने पर उन्होंने जिला जज के यहां अपील की। उसी अपील का निस्तारण करते हुए तत्कालीन जिला जज कृष्ण मोहन पांडेय ने ताला खोलने का आदेश दिया था। उमेश चंद पांडे कहते हैं कि दुख इस बात का है कि सुप्रीम कोर्ट तक रामलला के खिलाफ मुकदमा लड़ने वाले बाबरी मस्जिद के मुद्दई हाशिम अंसारी के बेटे को निमंत्रण मिला और राम जन्मभूमि का ताला खुलवाने वाले का कोई नाम तक नहीं ले रहा। उन्होंने कहा कि चारो शंकराचार्य विरोध कर रहे हैं इसका आधार धार्मिक हो सकता है लेकिन मुझे खुशी है की नए राम मंदिर में रामलला प्रतिष्ठित होने जा रहे हैं।
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