राममंदिर में तो लगी ही नहीं रामचन्द्र दास परमहंस की दान शिला,एक समय इसी बात की घोषणा कर अटल सरकार की बढ़ा दी थी परेशानी 

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Edited By Amrit Vichar
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अयोध्या, अमृत विचार : सुप्रीम फैसले के बाद जन्मभूमि पर भव्य राममंदिर का निर्माण जारी है। भूतल और गर्भगृह बनकर तैयार हो चुका है और 22 जनवरी को प्राण-प्रतिष्ठा की तैयारी है। राममंदिर आंदोलन के इतिहास में वर्ष 2002 में सर्वोच्च अदालत के यथास्थिति के आदेश के बावजूद प्रतिवाद भयंकर के नाम से चर्चित मंदिर आंदोलन के प्रमुख स्तंभ रहे महंत रामचन्द्र दास परमहंस ने शिलादान की घोषणा कर तत्कालीन अटल सरकार की पेशानी पर बल ला दिया था। मौके की नजाकत को देखते हुए सरकार को कर्फ्यू लगाना पड़ा था और बस-ट्रेन बंद करनी पड़ी थी, लेकिन परमहंस की जिद के आगे सरकार की एक न चली थी और कई दौर की वार्ता  के बावजूद पीएमओ में अयोध्या सेल के विशेष कार्याधिकारी शत्रुघ्न सिंह को शिला लेनी पड़ी थी। इस शिला से राममंदिर का निर्माण शुरू होना था, लेकिन यह शिला राममंदिर का हिस्सा नहीं बन पाई है और अभी भी कोषागार के डबल लाक तिजोरी से बाहर नहीं निकल पाई।   

आंदोलन से जुड़े रहे लोगों का कहना है 6 दिसंबर 1992 को ढांचा ध्वंस के बाद प्रदेश की कल्याण सरकार को बर्खास्त कर दिया गया और सर्वोच्च अदालत ने मौके पर यथास्थिति बनाये रखने का आदेश जारी कर रामजन्मभूमि परिसर की सुरक्षा केंद्रीय पैरामिलेट्री फ़ोर्स के हवाले कर दी। बावजूद इसके मंदिर निर्माण के लिए आंदोलन जारी रहा।  केंद्र में अटल बिहारी बाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार होने के बावजूद अपने लड़ाका तेवर के लिए चर्चित महंत रामचन्द्र दास परमहंस ने यज्ञ और शिलादान का ऐलान कर दिया।  उनके ही आश्रम दिगंबर अखाड़े में मार्च 2002 में अनुष्ठान हुआ और 6 फुट गुणा 2 फुट की राम शिला का पूजन हुआ। परमहंस के ऐलान से अदालती बंदिश के चलते केंद्र सरकार सकते में आ गई। उस समय अखाड़े में ही रहने वाले नारायण मिश्रा का कहना है कि सभी को परमहंस जी को मनाने के लिए लगाया गया और तमाम तर्क भी दिए गए लेकिन वह अपनी जिद से नहीं हटे। तमाम बंदिश के बावजूद वह हुजूम के साथ आश्रम से शिला लेकर रामजन्मभूमि को रवाना हुए और पीएमओ में अयोध्या सेल के विशेष कार्याधिकारी शत्रुघ्न सिंह को शिला लेनी पड़ी। पहले शिला को दशरथ महल में रखवाया गया और फिर कोषागार में जमा करा दिया गया।  
मंदिर विवाद में सुप्रीम फैसले के बाद जमीन का मालिकाना हक़ और कागजात तथा सोना-चांदी व रुपया आदि मंदिर के रिसीवर मंडलायुक्त ने ट्रस्ट के हवाले कर दिया, लेकिन परमहंस की ओर से दान की गई शिला कोषागार में रही। जिला प्रशासन का कहना है कि इस संबंध में केंद्र के निर्देश का इंतजार है।विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा का कहना है कि अब विश्व हिन्दु परिषद की भूमिका खत्म है। अब सब कुछ रामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट कर रहा है।

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