पीएम-जनमन का उद्देश्य

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Edited By Amrit Vichar
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देश तभी विकास कर सकता है जब समाज में कोई भी पीछे न छूटे और सरकारी योजनाओं का लाभ सभी तक पहुंचे। सरकार जनजातीय समूहों की जिंदगी बेहतर बनाना चाहती है। इसी के चलते वित्त वर्ष 2023-24 के बजट में केंद्र सरकार की ओर से इस बात का ऐलान किया गया था कि प्रधानमंत्री विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) विकास मिशन की शुरुआत करके कमजोर जनजातीय समूहों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को सुधारा जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि पीएम-जनमन योजना का उद्देश्य जनजातीय समुदायों को मुख्यधारा में लाना है। योजना के तहत सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल तक पहुंच, बेहतर स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, पोषण, सड़क एवं दूरसंचार कनेक्टिविटी के साथ-साथ स्थायी आजीविका के अवसर सहित विभिन्न क्षेत्र शामिल हैं।

साल 2011 में हुई जनगणना में सामने आए आंकड़ों के अनुसार देश में अनुसूचित जनजाति की आबादी 10.45 करोड़ थी जिसमें अब तक काफी वृद्धि हो गई होगी। इनमें से 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश अंडमान और निकोबार द्वीप पर रहने वाले ऐसे 75 समुदायों के बारे में जानकारी सामने आई थी, जिन्हें विशेष रूप से कमजोर वर्गीकृत किया था, जो शैक्षिक, आर्थिक और सामाजिक कमजोरियों से जूझ रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के लगभग 190 जिलों में सबसे पिछड़े आदिवासी समुदाय रहते हैं। सरकार ने दो महीने के भीतर 80,000 से अधिक आयुष्मान कार्ड वितरित करने का बड़ा काम किया है। इसी तरह सरकार ने अत्यंत पिछड़े आदिवासी समुदाय के लगभग 30,000 किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि से जोड़ा है और 40,000 लाभार्थियों के बैंक खाते खोले गए हैं।

वास्तव में आदिवासी समुदायों की सभी इच्छाएं अब पूरी होंगी क्योंकि सरकार ने पीएम-जनमन मेगा अभियान पर 23,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने की योजना बनाई है। पीएम-जनमन महाअभियान के तहत सरकार ने उन सभी नियमों को बदल दिया है, जो बाधा पैदा करते थे।

विशेष रूप से पीवीटीजी के उत्थान के उद्देश्य से यह पहल उनकी अनूठी चुनौतियों का समाधान करने तथा उज्ज्वल भविष्य के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा प्रदान करने की क्षमता रखती है। परंतु इसके कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों को दूर किए बिना जनजातीय समूह के लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाकर उनका विकास करना थोड़ा मुश्किल है।

इसके लिए मुख्यधारा के समाज और राज्य में पीवीटीजी द्वारा सामना किए जाने वाले कलंक और भेदभाव तथा हितधारकों एवं जनता के बीच संवेदनशीलता और जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों की मौजूदा योजनाओं और कार्यक्रमों के साथ योजना का समन्वय, अभिसरण तथा संसाधनों व सेवाओं का प्रभावी एवं कुशल वितरण और उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक है।