बरेली: विवादित ढांचा ढहाने के बाद रामभक्तों ने नहीं छोड़ी थीं ईंटें, ले गए अपने साथ
विकास यादव, बरेली। 6 दिसंबर 1992 को लाखों कार सेवकों ने विवादित ढांचे को ढहा दिया। ढांचे को ढहाने के बाद कार सेवकों ने वहां ईंटें तक नहीं छोड़ी और इन ईंटों को कार सेवक अपने-अपने साथ घर ले आए। ताकि विवादित ढांचे का नामो निशान ही मिट जाए। बरेली से भी उस दौरान सैकड़ों की सख्या में कारसेवक अयोध्या गए थे।
अपने अनुभव साझा करते हुए आदित्य शर्मा ने बताया कि बरेली से 3 दिसंबर को सैकड़ों कारसेवक अयोध्या के लिए रवाना हो गए थे। सुबह 4 दिसंबर को अयोध्या में संघ की बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें निर्णय लिया गया कि सभी कार सेवक रेत डालकर प्रतिकात्मक सेवा प्रदान करेंगे। जिससे लाखों कार सेवक का खून उबाल खा गया।
उसके बाद 6 दिसंबर को गुंबद से लेकर जमीन तक कार सेवकों ने ढांचे को गिराना शुरू कर दिया। उस दौरान सीआरपीएफ ने रोकने की कोशिश की, लेकिन राम भक्तों के आगे वह टिक न सके और कुछ देर तक तो अपने ऊपर हो रहे पथराव को रोकते रहे। उसके बाद हार मान कर पीछे हट गए। विवादित ढांचे को रामभक्तों ने गिरा दिया।
ईंटों तक को नहीं छोड़ा
विवादित ढांचा ढहाने के बाद वहां पर किसी प्रकार का कोई अवरोध उत्पन्न न हो इसको लेकर तुरंत ही अस्थाई मंदिर का टीन आदि लगा कर निर्माण कर दिया गया। साथ ही वहां पर विवादित ढांचे की एक ईंट भी नहीं रहने दी। कार सेवक उसे अपने साथ ले आए। बरेली के आदित्य सक्सेना भी अपने साथ ईटों को लेकर आए थे।
दिन में होली राम को दिवाली
अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाने में कई कार सेवक गंभीर रूप से घायल हो गए। कइयों ने अपनी कुर्बानी दी। लेकिन अपने लक्ष्य को पूरा करने का उत्साह और आनंद अलग ही था। अपने साथियों को खोने का गम और ढांचा गिराने की खुशी उस दिन अयोध्या में राम भक्तों ने दिन में होली मनाई और रात में दिवाली।
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