बाराबंकी: अपराध पीड़ित महिलाओं के प्रति संवेदनशील नहीं प्रशासन, दम तोड़ रही रानी लक्ष्मी बाई योजना

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बाराबंकी, अमृत विचार। अपराध पीड़ित 20 वर्ष से कम आयु की बच्चियों किशोरियों और युवतियों को महारानी लक्ष्मीबाई योजना से मदद करने का प्रावधान है। जिले में 63 ऐसी पीड़िताएं हैं जिन्हें समय से रिपोर्ट न लग पाने के कारण मदद नहीं मिल पा रही है। इसके अलावा सैकड़ों ऐसी बच्चियों को भी मदद नहीं मिली जिनकी रिपोर्ट पुलिस विभाग ने समय से अपलोड ही नहीं की। उन में वे मासूम बच्चियां भी हैं जिन्हें इलाज की सख्त जरूरत है।

महारानी लक्ष्मीबाई योजना से तेजाब का उपयोग कर गहरी चोट पहुंचाने वाली बच्चियों को तीन लाख से 10 लाख रुपए देने का प्रावधान है यह रकम 15 दिन के अंदर भुगतान कर दी जानी चाहिए परंतु ऐसा हो नहीं पा रहा है। दहेज मृत्यु की दशा में तीन लाख रुपए पीड़िता को बच के बच्चों को देने की योजना है। उन्हें यह राज इसलिए नहीं मिल पा रही है क्योंकि पुलिस विभाग ने समय से रिपोर्ट ही नहीं भेजी। 

दुष्कर्म का शिकार होने वाली 20 वर्ष से कम आयु की बच्चियों की मृत्यु होने की दशा में उनके अभाव को 10 लाख रुपए दिए जाने का प्रावधान किया गया है। तीन लाख रुपए उसे स्थिति में दिए जाते हैं। जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट दाखिल कर दी जाती है शेष तीन राशि सात लाख रुपये 3 महीने तक के भीतर दिए जाने का प्रावधान किया गया है। लेकिन आधा दर्जन से अधिक ऐसे मामले हैं जिनकी रिपोर्ट पुलिस विभाग ने सीडब्ल्यूसी को नहीं भेजी। 

नाबालिग बच्चियों के साथ दुष्कर्म के मामले में चिकित्सा रिपोर्ट और प्राथमिकी दाखिल किए जाने के बाद तीन तीन लख रुपए दिए जाने की व्यवस्था की गई है। सामूहिक दुष्कर्म के मामले में सात लख रुपए दिए जाने की व्यवस्था है। जिसमें एक लख रुपए तुरंत दे दिए जाते हैं जबकि शेष राशि चार सीट दाखिल होने के बाद एक महीने के अंदर दे दी जानी चाहिए।

लैंगिक प्रहार के मामले में तीन लाख दिए जाने की व्यवस्था है। एक लाख रुपए प्राथमिक दर्ज होने के बाद तथा दो लाख रुपए न्यायालय में चार सीट दाखिल होने के बाद एक मुफ्त दिए जाते हैं। पुलिस विभाग में इस कार्य के लिए अपर पुलिस अधीक्षक उत्तरी को नामित किया है। मगर उनके स्तर से समय से रिपोर्ट दाखिल नहीं की जा रही है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी के स्तर पर दो दर्जन से अधिक मामले लंबित हैं। 63 मामले सीडब्ल्यूसी में पड़े हुए हैं।

योजना के अंतर्गत पुलिस विभाग को नोडल अधिकारी बनाया गया है। जो ऐसे मामलों को वेबसाइट पर तुरंत अपलोड करती है। चिकित्सीय परीक्षण होने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी स्तर से रिपोर्ट दाखिल की जानी चाहिए। 63 मामले लंबित हैं जिनकी रिपोर्ट अभी तक न मिल पाने के कारण विभाग द्वारा दी जाने वाली मदद की धनराशि पीड़ितों के खाते में हस्तांतरित नहीं की जा सकी है..., पल्लवी सिंह जिला बाल एवं महिला कल्याण अधिकारी बाराबंकी।

यह भी पढ़ें:-बाराबंकी: मिठाई व्यवसायियों पर मेहरबान हुए श्रीराम, प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर मिल रहे लड्डू के आर्डर

 

संबंधित समाचार