मुरादाबाद : प्राचीन शिव मंदिर के पुजारी की हत्या के आरोप में दो अभियुक्त गिरफ्तार, एसएसपी ने किया खुलासा

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प्राचीन शिव मंदिर के पुजारी मुन्ना लाल पुरी हत्याकांड में गिरफ्तार अभियुक्त और जानकारी देते एसएसपी हेमराज मीना

मुरादाबाद,अमृत विचार। सिविल लाइन थाना क्षेत्र में गुरुवार को हुई सनसनीखेज वारदात के 24 घंटे में ही पुलिस ने दो अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें परमकीर्ति उर्फ संजय डांसर और कांति उर्फ बंटी हैं। ये दोनों थाना क्षेत्र में ही मोरा के रहने वाले हैं। पुलिस की पूछताछ में अभियुक्तों ने पुजारी की हत्या करने का कारण सुल्फा (गांजा) पीने के बाद सेवादारी के रुपये न देने का बताया है। वैसे इन अभियुक्तों का पूर्व से कोई अपराधिक इतिहास अभी तक सामने नहीं आया है। 

बताया जा रहा है कि घटना के बाद दोनों अभियुक्त डरे हुए थे। इनमें से घटना के बाद एक सीधे घर चला गया था, जबकि दूसरे ने और शराब पी थी और वह पूरी रात घर न जाकर बाहर ही पड़ा रहा था। इस मामले का खुलासा करते हुए एसएसपी हेमराज मीना ने बताया कि गिरफ्तार हुए दोनों अभियुक्त नशेड़ी हैं और इन लोगों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने बुधवार रात में अगवानपुर पुलिस चौकी क्षेत्र में पुरानी भटावली में रामगंगा नदी किनारे स्थित प्राचीन शिव मंदिर के पुजारी मुन्नालाल पुरी (65) की धारदार हथियार से निर्मम हत्या की है। पुजारी बरेली जिले के थाना भमौरा के सिरसा गांव के मूल निवासी थे। वह यहां शिव मंदिर पर पिछले करीब 10-12 साल से रह रहे थे।

सेवादारी के रुपये न देने पर पुजारी को मार डाला
एसएसपी ने बताया कि अभियुक्तों ने पूछताछ में बताया है कि वे लोग पुरानी भटावली में रामगंगा नदी किनारे स्थित प्राचीन शिव मंदिर में पुजारी बाबा मुन्नालाल के पास काफी समय से आते-जाते हैं। पुजारी की तन-मन से सेवा करते थे। बाबा के पर भी दबाते थे। खाना भी बनाते थे। इसके बदले में बाबा उन्हें सुल्फा, भांग का नशा करा देते थे और रुपए भी देते थे। 17 जनवरी को शाम हम दोनों (परमकीर्ति, कांति) बाबा के पास पहुंचे थे। मंदिर बंद होने के बाद बाबा सुल्फा पीने लगे थे।

बाबा ने बंटी से कहा, जा खिचड़ी बना ले तो उसने खिचड़ी बनाई और उन तीनों मिलकर खिचड़ी खाई। फिर बाबा और उन दोनों ने सुल्फा पिया। जाते समय रुपए मांगे तो बाबा ने मना कर दिया। इससे पहले के भी बकाया रुपए बाबा ने नहीं दिए थे। कई बार कहने पर भी बाबा ने रुपए नहीं दिए, फिर इसी गुस्से में आकर उन दोनों ने कमरे में रखे चाकू से बाबा पर कई वार कर दिए। बाबा की मौत हो गई। फिर उन दोनों ने चैनल खींचकर अंदर की तरफ से ताला लगा दिए और उसकी चाबी व चाकू लेकर  भाग गए थे। चाकू-चाबी उन्होंने सैदपुर खाद्दर रामगंगा पुल के अंत में झाड़ियां में फेंक दी थी।

कार्रवाई में शामिल टीम को मिला 10,000 का इनाम
एसएसपी हेमराज मीना ने पुजारी हत्याकांड में अतिशीघ्र खुलासा होने में एसपी सिटी अखिलेश भदौरिया, सीओ सिविल लाइन अर्पित कपूर और थानाध्यक्ष सिविल लाइन राम प्रसाद शर्मा की सराहना की। इनके साथ लगे अन्य पुलिसकर्मियों में अगवानपुर चौकी इंचार्ज मेघराज सिंह, हेड कांस्टेबल सुशील कुमार व नरेंद्र कुमार, कांस्टेबल विपिन कुमार, राज कुमार, मनोज कुमार, दीपक कुमार, सुधीर कुमार व वीरेंद्र कुमार का भी उत्साह बढ़ाकर पूरी टीम को 10,000 रुपये पुरस्कार देने की घोषणा भी की है। 

रात दो बजे हुआ पुजारी के शव का अंतिम संस्कार...
पुजारी मुन्ना लाल पुरी के छोटे भाई रामनाथ ने उनके शव का पोस्टमार्टम होने के उपरांत गुरुवार रात के दो बजे अंतिम संस्कार किया है। अंतिम संस्कार मंदिर परिसर में ही किया गया है। रामनाथ शाक्य ने बताया कि भाई के शव को अग्नि उन्होंने दी है, इसलिए वह अभी तीन-चार दिन तक मंदिर परिसर में ही रुकेंगे। उनके साथ में पत्नी गुड्डी, बेटा बब्लू, बहन मुन्नी और बहनोई मुरारी के साथ ही उनके दो साढ़ू भी हैं। साढ़ू धर्मपाल बदायूं के दातागंज और शंकर बरेली में हरदासपुर के रहने वाले हैं। रामनाथ ने बताया कि बड़े भाई मुन्ना लाल का रविवार को दसवां का कार्यक्रम है। 

सात साल पहले धर्मानंद ने मुन्ना लाल को सौंपी थी मंदिर की बागडोर
बताया जा रहा है कि 12 साल पहले महंत मुन्ना लाल पुरी भटावली गांव से करीब दूर रामगंगा किनारे स्थित प्राचीन शिव मंदिर में आकर रहने लगे थे। ग्रामीणों ने दावा है कि मंदिर करीब 200 साल पुराना है। जिस वक्त मुन्ना लाल पुरी आए थे, तब मुख्य पुजारी और महंत ठाकुरद्वारा के विजयपुर निवासी धर्मानंद थे। लेकिन, 2016 में धर्मानंद मंदिर की बागडोर अपने शिष्य मुन्ना लाल पुरी को सौंप कर चले गए थे। मंदिर में दिन में भटावली गांव और रामगंगा विहार, आशियाना समेत कई क्षेत्रों से काफी संख्या में लोग पूजा पाठ करने जाते थे। लेकिन, रात में महंत मंदिर में अकेले ही रहते थे।

दो भाई-एक बहन में बड़े थे पुजारी मुन्ना लाल
पुजारी मुन्ना लाल पुरी दो भाई व एक बहन थे। इनमें वह बड़े थे। छोटे भाई रामनाथ व इनसे बड़ी बहन मुन्नी हैं, जो अलीगंज में ब्याही हैं। रामनाथ ने बताया कि घर में गरीबी थी। पिता के पास ढाई बीघे जमीन थी वह भी बिक गई तो वह 18-20 साल पहले मजदूरी के लिए परिवार संग पानीपत चले गए थे। रामनाथ के परिवार में पत्नी गुड्डी व बच्चों में अनीता, बब्लू, काजल, शीतल हैं। रामनाथ पानीपत की एकता विहार कॉलोनी में रहकर बेलदारी करते हैं। बताया कि उन्हें गुरुवार सुबह 11 बजे बड़े भाई मुन्ना लाल की हत्या की सूचना मिली थी तो पत्नी गुड्डी व बेटे बब्लू के साथ रात के नौ बजे मुरादाबाद पहुंचे हैं। उनसे पहले उनकी बहन मुन्नी अलीगंज से अपने पति मुरारी के साथ घटनास्थल पर पहुंच गई थीं। रामनाथ ने बताया उनके बड़े भाई 40 साल की आयु में महंत बन गए थे। वह अविवाहित थे। साधु थे इसलिए गांजा (सुल्फा) के शौकीन थे। रामनाथ के मुताबिक, पिछले महीने बेटे बब्लू की शादी बरेली में अपने गांव से की थी तो बड़े भाई मुन्ना लाल आए थे, चार दिन रुके भी थे। मंगलवार शाम को उनकी भाई से फोन पर कुशलछेम भी हुई थी। बताया कि गांव में अब कोई नहीं रहता है, वहां घर में ताला लगा है।

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