प्रयागराज: देवरहा बाबा की तपोस्थली पर प्रज्वलित हो रही 100 फीट की रामनाम ज्योति, फहरा रहा पताका, देखें videos...
मिथलेश त्रिपाठी, प्रयागराज। राम मंदिर निर्माण के बाद आज पूरा देश राममय हो गया है। राम नाम की धूम और राममय हुई संगम नगरी में एक और अनोखी मिसाल देखने को मिली है। जहां देवरहा बाबा तपोस्थली पर श्रीराम नाम की ज्योति कई वर्षों से प्रज्वलित हो रही है। इस राम नाम की ज्योति के दर्शन के लिए संगम में भारी भीड़ जुट रही है।
संगम की रेती पर पिछले कई वर्षो से राम नाम की इस अखंड ज्योति की लौ को अलख जलाये हुए है। देवरहा बाबा की स्मृति में आज तक इसको लौ को बुझने नहीं दिया गया। इसकी लौ कभी कम नहीं हुई है। इतना ही नहीं शास्त्री ब्रिज से गुजरने वाले लोग इस राम ज्योति का दर्शन प्रतिदिन करते है।
बतादेंकि इस राम नाम अखंड ज्योति की स्थापना देवराहा बाबा आश्रम की तरफ से की गई थी। सुबह शाम इस आश्रम से जुड़े पुजारी राम दास नाव में बैठकर इस अमर ज्योति की आरती करने को आते हैं। आश्रम के पीठाधीश्वर कितनी भी बरसात हो या फिर बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो इस अमर ज्योति को कभी बुझने नहीं देते। लगभग 100 फीट की ऊंचाई पर इस अमर ज्योति के लिए विशेष मंच को तैयार किया गया है। जिसमें अमर ज्योति निरंतर जलती रहती है।

साथ ही सुबह शाम इसमें शुद्ध देशी घी भी डाला जाता है, ताकि यह ज्योति निरंतर चलती रहे। मचान वाले बाबा रामदास के मुताबिक रामनाम की यह अखंड ज्योति मानवता की रक्षा और सामाजिक हित के लिए प्रज्ज्वलित की गई थी। जो आज भी जल रही है। संगम में हर वर्ष माघ मेला और 6 वर्ष पर अर्थ कुंभ 12 वर्ष पर महाकुंभ लगता है। एक महीने से अधिक चलने वाले मेले में पूरा तंबुओं का शहर बसता है। इस मेले में कई साधु संतों के पहाल लगने वाले मेले में आकर्षण का केंद्र होते हैं।
इन्हीं बाबाओं के बीच में प्रयागराज झूसी पुल के पास मचान वाले बाबा का आश्रम है। बाबा को मचान वाले बाबा भी कहा जाता है। बाबा ने अपनी मचान को तकरीबन डेढ़ मंजिला मकान की बराबर बांस के सहारे मचान बनवाया है। जब बाढ़ बहुत विकराल रूप ले लेती है तो मचान वाले बाबा कुटिया को छोड़कर गंगा के किनारे आश्रम में चले जाते हैं और हर दिन अखंड ज्योति को देखने के लिए नाव से पहुंचते हैं।
एक फिट की बाती से जलती है लौ
नवल किशोर दास जी का कहना है कि इस राम नाम दीपक में एक फिट की बाटी लगेई जाती है जो एक दिन तक जलती है इसमें एक दिन मेंकामसे कम 10 लीटर देशी घी लगता है। जिसके सहारे दीपक जलता रहता है। इस दीपक को सिर्फ बाबा रामदास या उनके कहने पर ही कोई छू सकता है।
दीपक के पास बने हैं दो मचान
राम-राम दीपक के पास दो मचान भी बनाए गए हैं। एक मचनन में बाबा रामदास स्वयं रहते हैं और दूसरे मकान पर राम नाम की ज्योति जलाई गई है।इन दोनों मचान पर किसी के भी चढ़ने या बैठने की अनुमति नहीं है। बाबा रामदास को मचनन बाबा भी कहा जाता है। वह अपने मकान पर बैठकर ही अपनी साधना और पूजा करते हैं।
देवरहा बाबा की यादगार में यह राम नाम की अखंड ज्योति बीते कई वर्षों पहले जलाई गयी थी। जो आज तक लौ उसी तरह से जल रही है। नित्य इस ज्योति को देखा जाता है और इसे बुझने नहीं दिया जाता है।
नवल किशोर दास, आचार्य, देवरहा बाबा आश्रम, प्रयागराज
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