सिया राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में....                     

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रामोत्सव पर काव्य दुपहरी का हुआ आयोजन

हरदोई, अमृत विचार। अयोध्या में श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था ज्ञान योग परमार्थ न्यास, के तत्वावधान में श्रीरामोत्सव काव्योत्सव के रूप में प्रबंन्ध न्यासी सजीव अग्रवाल के आवास बिलग्राम मार्ग पर मनाया गया। जनपद के रचनाकारों ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन आदर्शों पर अपनी कविताएँ प्रस्तुत कर माहौल को राममय बना दिया। प्रबन्ध न्यासी सजीव अग्रवाल ने सभी कवियों को स्मृतिचिन्ह सहित श्रीराम उत्तरीय ओढ़ाकर सम्मानित किया। 

श्रीरामोत्सव का शुभारम्भ श्रीराम के चित्र के पूजन-अर्चन और न्यास के संस्थापक पूर्व आईएएस राधेश्याम अग्रवाल के चित्र पर पुष्पांजलि से हुआ। युवा कवयित्री सुश्री पल्लवी मिश्रा की वाणी वन्दना से श्रीरामोत्सव काव्य संगम का शुभारम्भ करते हुए श्रीराम गर्भगृह के प्रति यूं श्रद्धा जतायी -"कब मिले घर मेरे राम लला को कई सदी से यही तो पुकार है"। 

काव्योत्सव को गति देते हुए कवयित्री गीता गुप्ता 'मन' ने राममय होने कि संदेश दिया-
"मन अयोध्या अयोध्या हुआ जा रहा राम में हो रहा है मगन है हृदय"। गीतकार पवन 'प्रगीत' ने  श्रीरामामृत का आचमन किया- "आओ नत भाव से हम करें आचमन, आगमन राम का, राम का आगमन"।

सीमा गुप्ता 'असीम' ने श्रीरामागमन को साहित्यकारों की खुशी से जोड़ते हुए गाया- "साकेत के रचयिता खुश मैथिली शरण जी, तुलसी हृदय अधिश्वर श्री राम आ रहे हैं।" वहीं संचालन करते हुए श्री सरस्वती सदन के मंत्री मनीष मिश्र सारंग ने दोहों से श्रीराम के स्वागत में सजी अयोध्या का चित्र खींचा- "अवधपुरी जगमग हुई दृश्य पटल अभिराम, स्वागत को आतुर सभी आए हैं श्री राम"। ओज कवि राजेश बाबू अवस्थी ने  श्रीराम को राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक बताया- "कैसे मैं यह छोड़ देता राम जन्मभूमि को, राम मंदिर प्रतीक राष्ट्रीय स्वाभिमान का"। 

ज्ञान योग परमार्थ न्यास के प्रबंध निवासी सजीव अग्रवाल ने सभी का स्वागत किया। श्री सरस्वती सदन की लाइब्रेरियन ने सभी का आभार जताया। श्रीरामोत्सव काव्य संगम में कॉन्सेप्ट कार के प्रवीण सिंह और संस्थान के पदाधिकारी व कर्मचारियों सहित लक्ष्मीकांत मिश्र, नवल किशोर एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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