Kanpur: एक साथ उठी तीन अर्थियां; रह-रह कर गूंजती रहीं सिसकियां... अंगीठी के धुएं में दम घुटने से हुई थी मौत....
अंगीठी के धुएं में दम घुटने से मरने वाले तीन लोगों का पोस्टमार्टम कराया गया है।
कानपुर में अंगीठी के धुएं में दम तोड़ने वाले तीन लोगों का पोस्टमार्टम कराया गया। मरने वाले तीनों लोग एक ही परिवार के थे।
कानपुर, अमृत विचार। जूही बसंती नगर में सोमवार को कमरे में अंगीठी जला कर सोए बुजुर्ग दंपति व बेटे की मौत हो गई थी। मंगलवार को दो डॉक्टरों के पैनल तीनों का पोस्टमार्टम किया। पीएम रिपोर्ट में दम घुटने से तीनों की मौत की पुष्टि हुई। एक परिवार की तीन अर्थियां उठने से पोस्टमार्टम हादस में चीत्कार गूंज उठी। परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार भैरवघाट में किया। मां के बाद पिता का साया सिर से उठने से ध्रुव व निमिषा कई बार बेसुध हुए।
बसंती नगर में रहने वाले रविवार रात कारखाना संचालक पूरनचंद शर्मा(80), पत्नी मिथलेश शर्मा(78) व बड़ा बेटा नरेंद्र(52), पौत्र ध्रुव (18) व पौत्री निमिषा (22) अंगीठी जलाकर एक कमरे में सो गए थे, जबकि पूरनचंद का छोटा बेटा रामजी पत्नी रजनी व दो बच्चों के साथ दूसरे कमरे में सोए थे। सोमवार सुबह पूरनचंद, मिथलेश व नरेंद्र की मौत हो गई थी और ध्रुव व निमिषा को गंभीर हालत में गोविंद नगर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत की सूचना पर डीसीपी साउथ रविंद्र कुमार, एसीपी नौबस्ता आशुतोष कुमार समेत जूही थाने का फोर्स मौके पर पहुंचा। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया था। मंगलवार को सीएचसी ककवन के डॉ विवेक विलियम दुबे व कांशीराम के डॉ सुमित मिश्रा के पैनल में शवों का पोस्टमार्टम कराया गया, इस दौरान वीडियोग्राफी भी कराई गई।
पीएम रिपोर्ट में दम घुटने से मौत की पुष्टि हुई। देर शाम तक पोस्टमार्टम होने से परिजन शव को घर ले जाने के बजाए सीधे भैरवघाट ले गए। पोस्टमार्टम हाउस में परिजनों के साथ निमिषा व ध्रुव भी मौजूद रहे। एक साथ तीन शव उठे तो पोस्टमार्टम हाउस चीत्कारों से गूंज उठा। मां की मौत के बाद पिता का साया सिर से उठने पर निमिषा व ध्रुव बेसुध हो गए, जहां रिश्तेदारों ने उन्हें ढांढस बंधवाया।
मोहल्ले में ठंडे रहे चूल्हे, रिश्तेदारों का लगा तांता
क्षेत्र में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत के बारे में जिसने भी सुना हर कोई पीड़ित परिवार को सांत्वना देने दौड़ा चला आया। मंगलवार सुबह तक पूरनचंद के सारे रिश्तेदार उनके घर आ गए थे। पूरे मोहल्ले में सन्नाटा पसरा हुआ था, बस रह-रह कर सिसकारियां गूंज रही थीं। हर कोई पूरनचंद के मिलनसार स्वभाव के बारे में बाते कर रहा था। क्षेत्रीय लोगों व रिश्तेदारों ने बताया कि पूरनचंद बहुत ही सरल स्वभाव के थे।
मोहल्ले में किसी भी लड़की की शादी हो या कोई अन्य समारोह हो सबमें बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते थे। किसी को उम्मीद नहीं थी कि पूरनचंद 12 मार्च को अपनी पौत्री निमिषा की शादी में ही शामिल नहीं हो पाएंगे। हादसे के बाद मोहल्ले में लोगों के चूल्हे ठंडे पड़ रहे।
