बरेली: मौज बिजली वालों की... शहर में 20 हजार ई रिक्शा, वैध चार्जिंग स्टेशन एक भी नहीं
बरेली, अमृत विचार। शहर में 20 हजार से ज्यादा ई रिक्शा सड़कों पर दौड़ने के बावजूद एक भी चार्जिंग स्टेशन नहीं है। एक यही आंकड़ा यह बताने के लिए काफी है कि बिजली चोरी पर विभागीय अफसरों का रवैया क्या है। कई बार चोरी की बिजली से चलने वाले अवैध चार्जिंग स्टेशन पकड़े जा चुके हैं, निचले स्तर के विभागीय कर्मचारियों की सीधी साठगांठ भी सामने आ चुकी है, इसके बाद भी अफसरों की बेपरवाही उन पर भी सवाल खड़े कर रही है।
शहर के अलग-अलग सबस्टेशनों पर लाइन लॉस (बिजली चोरी होने का प्रतिशत) के आंकड़े भी यही कहानी कह रहे हैं। जिन इलाकों में ई रिक्शा के अवैध चार्जिंग स्टेशन ज्यादा हैं, उन इलाकों में लाइन लॉस भी काफी ज्यादा है। अनुमानित तौर पर शहर में अवैध चार्जिंग स्टेशनों की संख्या सैकड़ों में है। इनमें कुछ घरेलू कनेक्शनों पर चल रहे हैं तो ज्यादातर ने कटिया डालकर सीधे बिजली की लाइन से सप्लाई ले रखी है।
अनुमान है कि ई रिक्शा चार्ज करने वाले ही महीने में एक करोड़ से ज्यादा कीमत की बिजली चोरी करते हैं। इसके बावजूद उनके खिलाफ अभियान चलाने या छापे मारने का मामला विजिलेंस और बिजली विभाग के अफसरों के बीच विवाद की वजह बना रहता है। दोनों इसे एक-दूसरे की जिम्मेदारी बताकर टालते रहते हैं।
साढ़े तेरह हजार ई रिक्शा आरटीओ में रजिस्टर्ड, करीब आठ हजार और
आरटीओ के आंकड़ों के मुताबिक साढ़े 13 हजार ई रिक्शा का वहां रजिस्ट्रेशन है। इसके अलावा करीब आठ हजार ई रिक्शा बिना रजिस्ट्रेशन कराए शहर में दौड़ रहे है। इस तरह शहर में ई रिक्शा की संख्या 20 हजार से भी ज्यादा है। इनके लिए एक भी चार्जिंग स्टेशन का वैध कनेक्शन न होना अपने आप में इस बात की गवाही है कि हजारों ई रिक्शा चोरी की बिजली से चार्ज हो रहे हैं।
सौ रुपये तक की बिजली खाता है एक ई रिक्शा चार्ज होने में
एक ई रिक्शा में दो से चार बैटरी तक होती हैं। ई रिक्शा चलाने वालों के मुताबिक एक बार उन्हें चार्ज करने में आठ से दस यूनिट तक बिजली खर्च होती है। बिजली का कॉमर्शियल रेट प्रति यूनिट 10 रुपये से ज्यादा है। घरेलू दर भी सौ यूनिट से ऊपर नौ रुपये प्रति यूनिट होती है। इस तरह एक ई रिक्शा एक बार में चार्ज होने पर सौ या उससे ज्यादा कीमत की बिजली खा जाता है।
लाइनमैन जानते हैं कहां-कहां चल रहे अवैध चार्जिंग स्टेशन
अवैध चार्जिंग स्टेशन चलाने वालों की जड़ें बिजली विभाग में कहां तक पहुंची हुई हैं, इसका ताे अंदाजा लगाना मुश्किल है लेकिन इलाके के लाइनमैन से उनके सीधे संपर्क कई बार सामने आए हैं। पिछले दिनों बानखाना इलाके में विजिलेंस की टीम ने छह अवैध चार्जिंग स्टेशन पकड़े थे। ये सभी चार्जिंग स्टेशन कटिया डालकर चलाए जा रहे थे। लाइनमैन की साठगांठ का मामला भी सामने आया लेकिन उसे अनदेखा कर दिया गया।
140 रुपये तक चार्जिंग का रेट
ई रिक्शा चलाने वालों के मुताबिक बैटरी चार्ज होने में पांच से छह घंटे तक का समय लगता है। वे अपने ई रिक्शा चार्जिंग स्टेशन पर ही चार्ज कराते हैं। कुछ चार्जिंग स्टेशनों पर पैसे लेकर बैटरी बदल दी जाती है। दो बैटरी के लिए सौ और चार बैटरी के लिए 140 रुपये तक का भुगतान किया जाता है।
इन इलाकों में हैं चार्जिंग स्टेशन
सुभाषनगर, सैलानी, जगतपुर, कोहाड़ापीर, बानखाना, बदायूं रोड, करगैना, संजयनगर, सेटेलाइट, कसाई टोला, पुराना शहर, नवादा शेखान, कटरा चांद खां।
कई बार अवैध चार्जिंग स्टेशनों पर छापे मारकर रिपोर्ट दर्ज कराई गई है लेकिन ये लोग दोबारा अवैध चार्जिंग स्टेशन शुरू कर देते हैं। विभाग सिर्फ रिपोर्ट दर्ज करा सकता है। बिजली चोरी के मामले में गिरफ्तारी का प्रावधान न होने के कारण ऐसे लोगों का हौसला बुलंद रहता है। - रणविजय सिंह, मुख्य अभियंता
शहर में ई रिक्शा की चार्जिंग के लिए कितने स्टेशन है, इसकी जानकारी नहीं है। ई रिक्शा चलाने वाले अपने घर पर ही उन्हें चार्ज करते होंगे। - अंबा प्रसाद, अधीक्षण अभियंता
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