अमेठी: जायस में बजबजाती नालियों से उठ रही दुर्गंध, स्वच्छता मिशन की पोल खोल रही खुली पड़ी नालियां
लक्ष्मण प्रसाद वर्मा, अमेठी। एक तरफ जहां सरकार सफाई अभियान को लेकर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, वहीं जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते सरकार की मंशा पर पानी फिर जा रहा है। कुछ ऐसा ही हाल नगर पालिका परिषद जायस का है। सफाई के अभाव में जलनिकासी के लिए बनी नालियों में कूड़ा-कचरा पटा हुआ है।
नगर की मुख्य सड़कों पर पड़े कूड़े एवं जाम नालियों में बजबजाते कीड़ों को देख ऐसा प्रतीत होता है कि इस नगर पालिका के जिम्मेदारों पर सरकार के आदेश का भी कोई खास असर नहीं पड़ा है। जिम्मेदार नगर की साफ-सफाई पर ध्यान न देकर सरकार के स्वच्छ भारत मिशन अभियान की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
अगर समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो नगर में कई संक्रामक बीमारियां अपना पांव पसार सकती हैं। साफ-सफाई की हालत यह है कि नगर के मुख्य सड़क पर ही बनी नालियां पिछले कई महीनों से सफाई के अभाव में बजबजा रही हैं। इन जाम पड़ी नालियों पर विभिन्न प्रकार के कीटाणुओं ने अपना बसेरा बना लिया है।
नालियों में भरे गंदे पानी से उठ रही दुर्गंध के कारण दुकानदारों का दुकान में रहना एवं राहगीरों का सड़क पर चलना भी दूभर हो गया है, तो नालियों में बजबजा रहे कीड़े लोगों के खाने हेतु सामानों पर भी बैठ कर उसे दूषित कर रहे हैं। नगर के जगदीशपुर मोड़, जगदीशपुर मोड़ से पेट्रोल पंप, मलिक मोहम्मद जायसी शोध संस्थान के ठीक सामने, सिलाटर हाउस, जेर मस्जिद आदि स्थानों पर जाम नालियों एवं सड़क पर पसरे गंदे पानी को देखा जा सकता है।
कस्बे वासियों का कहना है कि सफाई कर्मी वार्डों में कभी-कभार सफाई करने के लिए आते भी हैं तो कोरम पूर्ति कर चलता बनते हैं। जिसकी शिकायत उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों से भी की लेकिन किसी ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया। जिससे आज भी नगर पालिका जायस सरकार की मंशा पर पूर्ण रुप से खरा उतरने को तरस रहा है।
गर्मी का मौसम आ रहा रहा है, बजबजाती नालियों से उठने वाली दुर्गंध से संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है, पालिका कर्मचारियों की लापरवाही की वजह से मुख्य मार्गों पर चारों तरफ खुली पड़ी बजबजाती नालियों से दुर्गंध उठ रही है.., रमेश कुमार सिंह।
दुकानों के सामने से गुजरी हुई नालियां कूड़े करकट से पटी पड़ी है, सफाई के नाम पर मशीनरी सिस्टम को खरीदने में पैसे पानी की तरह बहाए गए हैं, लेकिन व्यवस्थाएं जस की तस बनी पड़ी है.., जितेन्द्र सिंह।
कस्बे के मुख्य मार्गों पर जब पैदल चलना होता है तो नाक बंद करके जाना पड़ता है, खुली पड़ी गंदे पानी से भरी बजबजाती नालियों से उठने वाली दुर्गंध मन को विचलित कर देती है, मंदिरों पर पूजा पाठ करने जाते समय मन एकदम से व्यथित हो जाता है.., अरविंद मोदनवाल।
कस्बों में खुली नालियों में भरे गंदे पानी से दुकानों में रखे खाद्य पदार्थों में वैक्टीरिया और वायरस के फैलने से उल्टी दस्त और हैजे जैसी बीमारियां फैलती है, मानसून के दौरान इस रोग का सबसे ज्यादा प्रकोप रहता है, इससे बचने के लिए बाहरी खाद्य पदार्थो व दूषित पानी से दूरी बनाना पड़ेगा..,डॉ. अंशुमान सिंह सीएमओ अमेठी।
खुली नालियों में गंदा पानी भरा होने पर पाउडर का छिड़काव कराया जाता है, साफ-सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए सफाई कर्मचारियों को बराबर निर्देश दिए जाते रहते है, जहां भी गंदगी फैली है प्राथमिकता के आधार सफाई कराई जाएगी.., रविन्द्र मोहन ईओ नगर पालिका जायस।
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