Kanpur: मरीजों का भटकना होगा बंद... हैलट को मिली सीडी-4 मशीन; HIV, एड्स व टीबी की होगी हर जांच
हैलट अस्पताल में मरीजों को सीडी-4 जांच के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।
हैलट के संक्रामक रोग अस्पताल में आने वाले एचआईवी व एड्स के मरीजों को सीडी-4 जांच के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। इस जांच के लिए 35 लाख की मशीन राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण सोसाइटी (नाको) ने उपलब्ध करायी है।
कानपुर, अमृत विचार। हैलट के संक्रामक रोग अस्पताल में आने वाले एचआईवी व एड्स के मरीजों को सीडी-4 जांच के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के संक्रामक रोग अस्पताल में बने एआरटी सेंटर में इस जांच के लिए 35 लाख की मशीन राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण सोसाइटी (नाको) ने उपलब्ध करायी है।
मेडिकल कॉलेज से वर्तमान में करीब 12 हजार एचआईवी मरीजों का इलाज चल रहा है, इन मरीजों के लिए सीडी-4 जांच बेहद जरूरी होती है, जिसकी सुविधा अभी तक यहां नहीं थी। मरीजों को इस जांच के लिए अन्य डायग्नोस्टिक सेंटर जाना पड़ता था। लेकिन अब हैलट के संक्रामक रोग अस्पताल में बने एआरटी (एंटी रेट्रो टेस्ट) सेंटर में 35 लाख की सीडी-4 सेल मशीन स्थापित कर दी गई है।
इसका उद्घाटन मंगलवार को प्राचार्य प्रो.संजय काला, उप प्रचार्य प्रो.रिचा गिरी, प्रमुख अधीक्षक डॉ.आरके सिंह, संक्रामक रोग अस्पताल के सीएमएस डॉ.आरएस सिंह, मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ.एसी गुप्ता व डॉ.एमपी सिंह ने किया। प्राचार्य ने बताया कि एचआईवी की जांच में सीडी-4 (क्लस्टर ऑफ डिफरेंटेशन-4) मशीन काफी मददगार होती है। इससे एचआईवी संक्रमित और एड्स रोगियों में रोग के वायरस की संख्या कितनी है, इसका पता चल जाता है। इससे मरीजों के इलाज और मॉनिटरिंग में आसानी होती है।

टीबी कल्चर ड्रग सेंसटिव लैब बनकर हुई तैयार
कानपुर समेत आसपास जिलों के टीबी मरीजों को अब जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में टीबी से संबंधित सभी प्रकार की जांच उपलब्ध होगी। 42 दिन में मरीज की रिपोर्ट निगेटिव आने पर उनकी दवा छह माह ही चलेगी। इसके लिए कॉलेज में 64 लाख रुपये से टीबी कल्चर ड्रग सेंसिटिव लैब का निर्माण किया गया है। जीएसवीएम में टीबी कल्चर ड्रग सेंसिटिव लैब के निर्माण का काम लगभग पूरा हो चुका है।
अभी ऐसी लैब लखनऊ में है। इस कारण मरीजों के सैंपल वही भेजे जाते हैं। जीएसवीएम की लैब में फालोअप लिक्विड कल्चर व टीबी कल्चर की संयुक्त जांच होंगी। लैब में तीन सीनियर टेक्निकल, एक माइक्रोबायलॉजिस्ट व एक डाटाएंट्री आपरेटर की नियुक्ति होनी है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो.संजय काला ने बताया कि लैब का अगले माह से संचालन किया जाएगा। लैब में मौजूद मिजिट मशीन की मदद से 42 दिन में टीबी के निगेटिव की जांच व जानकारी हो सकेगी। एमडीआर के मरीजों की भी जांच यहां पर संभव है।
