Kanpur: जर्मन तकनीक से कूड़े से अलग होगा मलबा; गंगा में सॉलिड वेस्ट रोकने को बनेगा बूम बैरियर...

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

जर्मनी की टीम ने सीओडी नाले का निरीक्षण किया।

शुक्रवार को शहर आई जर्मनी की टीम ने सीओडी नाले का निरीक्षण किया। इंडो जर्मन प्रोजेक्ट के तहत गंगा में जाने वाले सॉलिड वेस्ट को रोकने के लिए यहां बूम बैरियर बनाया गया है।

कानपुर, अमृत विचार। शुक्रवार को शहर आई जर्मनी की टीम ने सीओडी नाले का निरीक्षण किया। इंडो जर्मन प्रोजेक्ट के तहत गंगा में जाने वाले सॉलिड वेस्ट को रोकने के लिए यहां बूम बैरियर बनाया गया है। इसके अलावा सरायमीता में जर्मनी के सहयोग से एमआरएफ (मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) प्लांट बनाया जा रहा है। यहां विशेष मशीन से कूड़े से प्लास्टिक, लोहा, मलबा और अन्य मैटेरियल अलग-अलग किया जाएगा।

नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. अमित सिंह ने बताया कि इंडो जर्मन प्रोजेक्ट के हेड क्रिस्टिन कैपफेसिटीनीयर और उनकी टीम आई थी। सबसे पहले वे कृष्णा नगर स्थित कूड़ा अलग करने के मैनुअल प्रॉसेस को देखने गए थे। इसके बाद सीओडी नाला और इसके बाद पनकी सरायमीता में निर्माणाधीन एमआरएफ प्लांट का निरीक्षण किया। यहां करीब 60 फीसदी सिविल कार्य पूरा किया जा चुका है। 

सरायमीता में प्लांट का काम पूरा होते ही जर्मनी से मशीन कानपुर भेजी जाएगी। इसके बाद आसपास के 3 वार्डों को कूड़ा इसी प्लांट में अलग-अलग कर निस्तारित किया जाएगा। इस प्लांट में रोजाना करीब 5 मीट्रिक टन कूड़ा रोजाना निस्तारित किया जा सकेगा। पनकी, सरायमीता, आवास विकास-3 वार्ड से कूड़ा प्लांट में भेजा जाएगा। 

समुद्र में कचरा रोकने के लिए इंडो-जर्मन प्रोजेक्ट

केंद्र सरकार के स्तर पर एक इंडो-जर्मन प्रोजेक्ट ऐसे कचरे को समुद्र में जाने से रोकने के प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। इसी प्रोजेक्ट के तहत भारतीय और जर्मनी के पर्यावरण विशेषज्ञ गंगा के जरिये समुद्र में बढ़ रहे प्रदूषण को रोकने पर काम कर रहे हैं। इसके तहत देश में कानपुर, पोर्टब्लेयर और कोच्चि को ही चुना गया है।

यह भी पढ़ें- गड्ढों की तो बात छोड़िये सरियों का जाल भी आया बाहर; कुछ ऐसा है कानपुर में 11 साल तक बने सीओडी पुल का हाल...

संबंधित समाचार