लखनऊ : कानून के छात्रों को प्रो. राजेश हर्षवर्धन ने दिलाई अंगदान की शपथ, कहा- एक व्यक्ति आठ लोगों की बचा सकता है जान

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लखनऊ, अमृत विचार। राज्य अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (सोटो) और एसजीपीजीआई के अस्पताल प्रशासन विभाग की तरफ से एमिटी यूनिवर्सिटी में एक जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह जागरुकता कार्यक्रम में अंगदान को लेकर कानून के छात्रों को जागरूक करना था। गुरुवार को आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन के संयुक्त निदेशक डॉ. राजेश हर्षवर्धन ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को अंगदान की शपथ दिलाई।

इस दौरान प्रो. राजेश हर्षवर्धन ने बताया कि अंग और ऊतक दान के क्षेत्र में चिकित्सा विज्ञान में निरंतर प्रगति के साथ अब यह स्थापित हो गया है कि एक व्यक्ति के अंगदान से 8 लोगों की जान बच सकती है और ऊतक दान से लगभग 75 व्यक्तियों के जीवन में सुधार होता है। इसके साथ ही अंग दाताओं की कमी के कारण प्रत्यारोपण की आवश्यकता वाले रोगियों की प्रतीक्षा सूची में भी वृद्धि हुई है।

भारत में प्रत्यारोपण की आवश्यकता वाले रोगियों और उपलब्ध अंगों के बीच एक बड़ा अंतर है। एक अनुमान के अनुसार भारत में प्रति वर्ष लगभग 2 लाख मरीज़ों की लिवर फेल्योर या लिवर कैंसर से मृत्यु हो जाती है, जिनमें से लगभग 10-15 प्रतिशत को समय रहते लिवर प्रत्यारोपण से बचाया जा सकता था। भारत में वार्षिक रूप से लगभग 25-30 हजार लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है, लेकिन केवल 1,500 प्रत्यारोपण ही हो पा रहे है। इसी प्रकार, भारत में प्रतिवर्ष लगभग 500,000 व्यक्ति  हार्ट फ़ेल  से पीड़ित होते हैं, लेकिन हर वर्ष केवल 10-15 हृदय प्रत्यारोपण ही किए जाते हैं। पूरे भारत में लोगों को किडनी, लिवर, हृदय, कॉर्निया और फेफड़े के प्रत्यारोपण की अत्यधिक आवश्यकता है।

इस अवसर पर वैज्ञानिक सत्र की शुरुआत डॉ. वैभव श्रीया ने मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 की जटिलताओं पर प्रकाश डाला।  डॉ. रेनू यादव ने अंगदान के दस आम मिथकों के बारे में बताया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य व्यक्तियों को सटीक जानकारी के साथ सशक्त बनाना और सूचित निर्णयों को बढ़ावा देना था। डॉ. क्रिस अग्रवाल ने विभिन्न डेटा चार्ट के माध्यम से इस समय अंगों और ऊतकों की आपूर्ति और मांग के बीच भारी असमानता पर प्रकाश डाला। 

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