मुरादाबाद : मखाना उत्पादित कर मालामाल हो सकेंगे परिक्षेत्र के किसान
संभावना : जार्डस मनोहरपुर ने इस संभावना की खोज की , दो प्रजाति के मखाना का उत्पादन औसत रहा
आशुतोष मिश्र, अमृत विचार। धातु शिल्पकारी और निर्यात के लिए प्रसिद्ध मुरादाबाद मखाना की खेती की संभावना वाला भी है। गन्ना, आलू उजपाने वाले किसान मखाना उत्पादन कर मालामाल हो सकेंगे। किसान कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (जार्डस) मनोहरपुर ने इस संभावना की खोज की है। बिहार राज्य के गोपालगंज जिले से लाया गया मखाना यहां औसत उत्पादन वाला साबित हुआ है।
मंडल और असापास के क्षेत्र में जलभराव वाली कृषि भूमि है। मंडल के रामपुर, अमरोहा क्षेत्र में मछली का पालन रिकार्ड बना चुका है। पानी वाली भूमि और ऐसे क्षेत्र में मखाना की खेती हो सकती है। केंद्र ने इसका सफल परीक्षण किया है। यह जलाशय में सिंघाड़ा उत्पादन जैसा कार्य है। जार्डस ने मखाना की दो प्रजाति के बीज का प्रयोग करके इस संभावना को चरितार्थ कर दिखाया है। पांच से छह माह में इसका उत्पादन संभव हुआ है। यहां की जलवायु इस कार्य में सहायक होगी।

जानकारों का मानना है कि कृषि और मछली पालन का प्रशिक्षण लेने वाले मखाना की खेती का उत्पादन कर सकेंगे। केंद्र की ओर से कृषि और विविधीकरण के तहत प्रशिक्षण पाने वालों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। वैसे तो परिक्षेत्र वर्ष के अधिकांश समय जलवायु गर्म रहती है। गर्मियों में औसत तापमान 25 से 46 डिग्री सेल्सियस तक होता है। मई और जून सबसे गर्म महीने होते हैं। मानसून जुलाई-सितंबर तक चलता है, जिससे औसतन 967 मिमी वर्षा होती है। सर्दी नवंबर से फरवरी-मार्च तक रहती है।
हिमालय क्षेत्र से आने वाली ठंडी लहरें क्षेत्र में सर्दियों को बहुत ठंडा बना देती हैं। सर्दियों के चरम पर तापमान 3 से 4 डिग्री.तक गिर जाता है। महानगर के उत्तर पूर्व में रामगंगा नदी और दक्षिण पश्चिम में गंगा नदी बहती है। मंडल क्षेत्र दिल्ली से उत्तराखंड राज्य के कई लोकप्रिय हिल स्टेशनों (जैसे नैनीताल, रानीखेत, अल्मोडा आदि) और जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क (टाइगर रिजर्व) के मार्ग पर है। यहां उत्तर में बिजनौर, दक्षिण में संभल, पूरब दिशा में रामपुर और पश्चिम में अमरोहा जिला है।

केंद्र में यह प्रयोग सफल हो चुका है। मखाना किसानों को बेहतर आमदनी करा सकता है, यहां की खेती की जमीन नीची है। अक्सर ऐसे इलाके जलभराव से जूझते हैं। ऐसे में किसान मछली पालन से आसान स्थिति में इसे अपना सकते हैं। इसके लिए दो से ढ़ाई फुट पानी चाहिए। इसकी फसल में कांटे होते हैं। प्रोसेसिंग के जरिए इसे बाजार के लायक बनाया जाता है। बाजार में मखाना की कीमत 800 रुपये प्रति किलोग्राम तक है।-डा.दीपक मेंदिरत्ता, निदेशक (किसान कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान)
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