गोंडा: घोटाला पकड़ने पर निलंबित कर दिए गए बीईओ, एक महीने बाद मिला आदेश
बेलसर बीईओ रहे ध्रुव जायसवाल को भारी पड़ी व्यवस्था में बदलाव की कवायद, एक महीने तक निलंबन आदेश दबाए बैठे रहे अफसर
गोंडा, अमृत विचार। बेसिक शिक्षा के परिषदीय स्कूलों में बदलाव की कवायद खंड शिक्षा अधिकारी बेलसर को भारी पड़ गयी। जांच के दौरान भ्रष्टाचार का खुलासा करने और 3.42 लाख रुपये के घोटाले की रिपोर्ट अफसरों को भेजने पर उन्हें 11 जनवरी को उगाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया।
हैरत यह है कि निलंबन की कार्रवाई करने वाले अफसर इस आदेश को सार्वजनिक करने की हिम्मत नहीं जुटा सके। अब एक महीने बाद उनका निलंबन आदेश सार्वजनिक किया गया है। निलंबन आदेश मिलने पर बीईओ ध्रुव जायसवाल हतप्रभ हैं। इस कार्रवाई ने प्रदेश सरकार के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस वाले दावे को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
बेलसर ब्लाक में तैनात खंड शिक्षा अधिकारी ध्रुव कुमार जायसवाल क्षेत्र के परिषदीय स्कूलों की व्यवस्था को लगातार बेहतर बनाने में जुटे थे। न सिर्फ स्कूलों की व्यवस्था बल्कि शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिये वह ताबड़तोड़ स्कूलों का निरीक्षण कर रहे थे। उनके निरीक्षण में कई शिक्षक नेता गैरहाजिर मिले थे। इसकी रिपोर्ट उन्होने बीएसए को भेजी थी।
बीते अगस्त महीने में उन्होंने ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय डरौलीडीहा पंडितपुरवा में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला पकड़ा था। बीईओ की पड़ताल में 3.42 लाख रुपये का गबन पकड़ा गया था। इसकी भी रिपोर्ट आला अफसरों को भेजी गयी थी। इसके बाद से ही बीईओ के खिलाफ साजिश रची जा रही थी।
एडी के आदेश पर उन्हें ब्लाक से हटाकर मुख्यालय पर अटैच कर दिया गया था। घोटाले के जिम्मेदार शिक्षकों को बचाने में जुटा शिक्षक नेताओं का कॉकस लगातार बीईओ के खिलाफ शिकायत कर रहा था। बीईओ की कार्रवाई से तिलमिलाए शिक्षकों ने बीईओ पर उत्पीड़न करने और धन उगाही का आरोप लगाया था। मामले की जांच डायट प्राचार्य को सौंपी गयी थी।
प्राचार्य ने घोटाले का संज्ञान लेने के बजाय बीईओ को ही दोषी ठहरा दिया और रिपोर्ट भेज दी। प्राचार्य की रिपोर्ट को आधार बनाकर बीईओ ध्रुव जायसवाल को 11 जनवरी को निलंबित तो कर दिया गया लेकिन निलंबन करने वाले अफसर इस आदेश को दबाए बैठे रहे। ठीक एक महीने बाद सोमवार को इस आदेश को सार्वजनिक किया गया। सोशल मीडिया पर बीईओ के निलंबन का आदेश वायरल हुआ तो खुद ध्रुव जायसवाल भी हतप्रभ रह गए।
इस कार्रवाई को लेकर शिक्षा विभाग में चर्चाओं का बाजार गर्म है। बीईओ को मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय अयोध्या से संबद्ध किया गया है और इसकी जांच देवी पाटन मंडल के सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक को सौंपी गयी है।
निलंबन के बाद भी एक महीने तक मुख्यालय पर लिया जाता रहा कार्य
बीईओ ध्रुव जायसवाल के निलंबन ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अमूमन किसी विभाग के अफसर या कर्मचारी पर हुई कार्रवाई तत्काल सार्वजनिक हो जाती है। उसे तत्काल उसके पद से कार्यमुक्त कर दिया जाता है और उस पर लगे आरोपों की जांच शुरू हो जाती है, लेकिन खंड शिक्षा अधिकारी ध्रुव जायसवाल के मामले में ऐसा नहीं हुआ।
11 जनवरी को उनका निलंबन आदेश तो बनाया गया लेकिन उसे दबाए रखा गया। आखिर क्या वजह रही कि कार्रवाई के बाद अफसर उनका निलंबन आदेश दबाए रहे। निलंबन के बावजूद उनसे बीईओ मुख्यालय के तौर पर कार्य लिया जाता रहा। बीएसए प्रेमचंद यादव से जब इन सवालों का जवाब जानने की कोशिश की गयी तो उन्होने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
आदेश मिलते ही बीईओ को किया कार्यमुक्त
अमृत विचार: सोमवार को जैसे ही बीईओ ध्रुव जायसवाल का निलंबन आदेश सार्वजनिक हुआ बीएसए ने तत्काल उन्हे मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय अयोध्या के लिए कार्यमुक्त कर दिया। बीएसए ने बताया कि आज निलंबन आदेश मिला है। आदेश के बाद बीईओ को रिलीव कर दिया गया है।
यह था पूरा मामला
बेलसर का प्राथमिक विद्यालय डरौलीडीहा पंडितपुरवा वर्ष 2018 से बंद चल रहा था। बीईओ की जांच में इसका खुलासा हुआ था। स्कूल के प्रभारी प्रधानाध्यापक समेत चार शिक्षकों ने बगल के स्कूल में अपना अटैचमेंट करा रखा था। इस अटैचमेंट की सूचना भी जिला मुख्यालय के अफसरों को नहीं दी गयी थी।
खंड शिक्षा अधिकारी की सख्ती के बाद इस स्कूल या स्कूल का संचालन प्रारंभ हुआ था। जांच के दौरान स्कूल के कंपोजिट ग्रांट में भी धांधली मिली थी और 3.42 लाख रुपये का घोटाला सामने आया था। बीईओ ने इसकी रिपोर्ट बीएसए समेत अन्य आला अफसरों को भेज दी थी। इस कार्रवाई से घोटालेबाज तिलमिलाए हुए थे और बीईओ के खिलाफ साजिश रचने में जुटे थे।
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