अयोध्या : प्राण-प्रतिष्ठा के बाद शनिवार को आरती भोग के बाद बंद हुआ मंदिर का कपाट
अयोध्या, अमृत विचार। भव्य मंदिर में अपने आराध्य को निहारने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु का हुजूम उमड़ रहा है। प्रतिदिन करीब दो लाख श्रद्धालु रामलला का दर्शन-पूजन कर रहे हैं। रामलला को विश्राम देने के लिए श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट ने दर्शन अवधि अब बदलाव किया है। प्राण-प्रतिष्ठा के बाद शनिवार को पहली बार रामलला ने 50 विश्राम किया है। शनिवार को दोपहर 12 बजे से एक बजे के बीच आरती भोग लगने के बाद मंदिर के गर्भगृह का कपाट बंद कर दिया गया। इस दौरान रामलला ने विश्राम किया।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने बताया कि शनिवार का दोपहर 12 बजे की आरती के बाद मंदिर का पट बंद कर दिया गया जाएगा। इस दौरान करीब 50 मिनट तक रामलला को विश्राम कराया गया। मंदिर का कपाट एक बजे के करीब फिर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया गया। बता दें कि प्राण-प्रतिष्ठा के बाद रामलला के दर्शन के लिए श्रद्धालु का रेला उमड़ा तो मंदिर को सुबह सात बजे से रात 10 बजे तक खोलना पड़ा। उसके बाद रामलला को दोपहर में विश्राम नहीं कराया जा रहा था।
दोपहर की आरती में शामिल हुए 200 पास धारक
रामलला के दोपहर में भोग आरती के दौरान लगभग 200 भक्त शामिल हुए। राम मंदिर में एक बार फिर से आरती में श्रद्धालुओं को पास की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके लिए श्रद्धालुओं को ऑनलाइन और काउंटर के मध्याम से पास उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पहले दिन दोपहर में 12 बजे पास धारकों को राम मंदिर में प्रवेश दिया गया।

पूजित गंगा जल से रामलला के रजत प्रतिमा का किया गया अभिषेक
प्राण प्रतिष्ठा के बाद से राम मंदिर में चल रहे 45 दिवसीय मंडपोत्सव में शनिवार को भीष्माष्टमी पर पूजित गंगाजल से रामलला की उत्सव मूर्ति का अभिषेक किया गया। माघ शुक्ल अष्टमी को राममंदिर के ट्रस्टी जगद्गुरु विश्वप्रसन्न तीर्थ ने प्रमोदवन स्थित अपने आश्रम में गंगाजल से युक्त कलश की विधिविधान पूजा-अर्चना की। इसके बाद पैदल कलश लेकर रामजन्मभूमि परिसर पहुंचे। जहां यज्ञस्थल का गंगाजल से अभिषेक किया गया और कलश स्थापना कर पूजन हुआ। पूजन के बाद इसी जल कलश से रामलला का अभिषेक किया गया।
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