Etawah: जिस दिन हुआ दोहरा हत्याकांड...33 साल बाद उसी दिन कोर्ट ने आरोपी को सुनाई आजीवन कारावास, पढ़ें- पूरा मामला
इटावा में दोहरे हत्याकांड के आरोपी को कोर्ट ने सुनाई आजीवन कारावास
इटावा, अमृत विचार। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर नौ रूपेंद्र सिहं टोंगर ने कोतवाली क्षेत्र में 33 साल पूर्व हुए दोहरे हत्याकांड के मामले की सुनवाई करते हुए एक आरोपी को दोषी पाया है। दोषी पाए जाने पर कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
इसके साथ ही कोर्ट ने आरोपी 70 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। जुर्माना अदा न करने पर उसे छह माह के कठोर कारावास की सजा भुगतनी पडेगी। इससे पहले इस मामले के तीन आरोपियों को पहले ही सजा हो चुकी थी।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता अजीत प्रताप सिंह तोमर ने बताया कोतवाली क्षेत्र की रहने वाली जमीला पत्नी नबाब खां ने दर्ज कराई रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि उसके पुत्र हसन के पास दो बसें थी। एक बस में रामौतार दीक्षित पार्टनर थे। बसों के हिसाब किताब को लेकर दोनों में अकसर विवाद होता रहता था।
22 फरवरी 1991 को हसन अपने घर पर था तभी रामौतार दीक्षित का साला राम जी दुवे उसके घर आया और कहा कि बसों के हिसाब किताब के लिए पक्का तालाब वाले घर पर बुलाया है। उसके बुलाने पर वह हसन वह व उसके पति नबाब खां उसके साथ चल दिए। उसके पति पुलिस में सिपाही के पद पर तैनात थे। जब तीनों दोपहर को करीब डेढ बजे रामौतार दीक्षित के पक्का तालाब वाले मकान पर पहुंचे।
वहां हिसाब किताब को लेकर विवाद हो गया। विवाद के बाद में रामौतार दीक्षित ने अपने साथियों के साथ मिलकर हसन व नबाब खां को गोली मार दी। गोली लगने से दोनों की मौत हो गई। उसने बचाने का प्रयास किया तो उन लोगो ने उसके ऊपर भी हमला कर दिया। बाद में उक्त लोग भाग गए।
सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और छानवीन की। मौके पर खोखे कारतूस के अलावा अन्य सामान बरामद हुआ। बाद में तहरीर के आधार पर पुलिस ने रामौतार दीक्षित राम जी दुवे गुढ्ढन उर्फ सिद्वेश्वर व दिलीप के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
पुलिस ने सभी के खिलाफ आरोपपत्र कोर्ट में पेश कर दिए। बाद में सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों को कोर्ट ने सजा सुनादी थी लेकिन फैसला आने के दिन गुड्डन फरार हो गया था। बाद में उसकी गिरफ्तारी हुई। उसके बाद उसके मामले की सुनवाई कोर्ट में शुरू की गई।
गुड्डन के मामले की सुनवाई अपर जिला एंव सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर नौ में हुई। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता के द्वारा पेश किए साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर कोर्ट ने गुड्डन को भी दोषी पाया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
इसके अलावा कोर्ट ने उस पर 70 हजार रूपया का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना अदा न करने पर उसे छह माह का अतिरिक्त कारावास भोगना पडेगा।
