Chitrakoot News: अधिकारियों के सामने ग्रामीणों ने किया सांसद का विरोध...इस बात पर जताया गुस्सा
चित्रकूट में अधिकारियों के सामने ग्रामीणों ने किया सांसद का विरोध
चित्रकूट, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी मनोज कुमार सिंह बुधवार को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे भरतकूप के पास जीरो प्वॉइंट पहुंचे। उनके साथ सांसद आरके सिंह पटेल और डीएम सहित अन्य अधिकारी भी थे।
मनोज कुमार सिंह ने डीएम एवं यूपीडा के अधिकारियों से वहां निर्माण कार्य की जानकारी ली। इस दौरान एक्सप्रेसवे से हवाई पट्टी को जोड़ने वाले लिंक रोड को लेकर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को देखकर अकबरपुर ब और गोंडा आदि के आदिवासी और ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए।
उल्लेखनीय है कि लिंक रोड के प्रस्तावों को लेकर ग्रामीणों में जमकर असंतोष है। इनका कहना है कि पहले प्रस्ताव में जहां लिंक रोड क्रशरों से होकर जाना था, वहीं उद्योगपतियों के दबाव में अब इसे आदिवासी बस्ती से होकर ले जाने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे उनके रोजी रोजगार छिन जाएंगे और घर उजड़ जाएंगे। वे कई बार इस संबंध में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को ज्ञापन भी दे चुके हैं।
बताया जाता है कि ग्रामीण अपनी बात कह रहे थे तभी सांसद बांदा-चित्रकू आरके सिंह पटेल ने उनको समझाने और अपना पक्ष रखने की कोशिश की। इस पर ग्रामीणों ने सांसद पर उनकी समस्याओं की उपेक्षा करने का आरोप लगा दिया।
ग्रामीणों का कहना था कि आप व्यापारियों को देखने के लिए आ गए पर पब्लिक को देखने के लिए नहीं आए। इस पर एक ग्रामीण, जो ज्यादा प्रतिवाद कर रहा था, से सांसद ने कहा, मैं सबका द्याखत हूं, मोहीं नेतागिरी न सिखाव। जा बाहिर। सांसद और अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाया कि उनके हितों को नुकसान नहीं पहुंचने दिया जाएगा।
इस संबंध में सांसद के प्रतिनिधि शक्तिप्रताप तोमर ने बताया कि ग्रामीणों के मन में सांसद के रुख को लेकर गलत धारणा है। असल में इन दोनों प्रस्तावों के पूर्व एक और प्रस्ताव था, जिस पर सांसद की सहमति थी। उन्होंने बताया कि इसके अनुसार, लिंक रोड पुरवा तरौंहा, तरांव और टिटिहरा होते हुए जानी थी।
इसमें घरों और उद्योगों के उजड़ने की आशंका नहीं थी। यह राम वनगमन पथ के फोरलेन से जुड़ते हुए चंद्रगहना तक जाती। इसको यूपीडा के अभियंताओं ने महज इसलिए नकार दिया कि इसमें रेलवे ओवरब्रिज बनाना पड़ता।
शक्ति ने बताया कि सांसद न तो उद्योगनगरी को उजाड़ना चाहते हैं और न चाहते हैं कि गरीब ग्रामीणों का घर टूटे। क्रशर उद्योग को नुकसान पहुंचा तो जिले का राजस्व प्रभावित होगा। उन्होंने दावा किया कि सांसद के प्रस्ताव और मंशा को लेकर ग्रामीणों में गलतफहमी है।
ये भी पढ़ें- Kannauj: BSA कार्यालय में रिश्वत लेते बाबू को एंटी करप्शन टीम ने किया गिरफ्तार...कर्मचारियों ने लगाए ये गंभीर आरोप
