लखनऊ: अंग्रेज देते थे पेंशन, मौजूदा सरकार क्यों चुप, कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन का फिर उठाया मुद्दा

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Edited By Amrit Vichar
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लखनऊ, अमृत विचार। कर्मचारियों का हक पेंशन अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही है, लेकिन मौजूदा सरकार इस मसले पर मौन साधे हुये हैं। मंत्री सांसद भी इस मामले में कुछ नहीं बोल रहे हैं। यह कहना है इंडियन पब्लिक सर्विस इंप्लाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीपी मिश्रा का। उन्होंने बताया कि सभी सांसदों और मंत्रियों को पत्र भेजकर कर्मचारियों की पीड़ा बताई गई है, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। 6 मार्च को सत्याग्रह ही कर्मचारियों के लिए आगे का रास्ता प्रशस्त करेगा।

महासचिव प्रेमचंद ने बताया कि कर्मचारियों के दबाव का असर हुआ है। जिस पर केवल पुरानी पेंशन बहाली पर सरकार की तरफ से एक कमेटी गठित की गई। जिसकी रिपोर्ट आनी है। अन्य दोनों मांगों पर भारत सरकार मौन है। इसी वजह से इप्सेफ ने ध्यान आकर्षण के लिए 6 मार्च को देशभर के सभी जनपद मुख्यालयों पर ध्यान आकर्षण सत्याग्रह करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय छत्तीसगढ़ की बैठक में 16 फरवरी को लिया गया था। वीपी मिश्रा ने कहा कि जीवन का प्रमुख समय कर्मचारी सरकारी सेवा में निकाल देता है उसे बाहर कोई काम करने की छूट भी नहीं है। सरकार की अनदेखी के करण उनके बच्चों की शिक्षा दीक्षा खान-पान,इलाज आदि पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। 

सरकार का दायित्व है कि कर्मचारियों की पीड़ा का तत्काल समाधान कर दें तो आंदोलन की आवश्यकता ना पड़े। पेंशन न मिलने पर बूढ़े कर्मचारी परिवार की रोटी कैसे चलेगी इसके लिए पेंशन बहाली जरूरी है। सरकार को कर्मचारियों की समस्या को देखते हुए चुनाव से पूर्व निर्णय अवश्य करना चाहिए। 

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