बरेली: न्याय के मंदिर ने लिया स्वत: संज्ञान, 14 साल के बाद दंगे का वनवास खत्म- राजेश अग्रवाल
दंगे से शहर को बचाने के लिए योद्धा की तरह अकेले लड़ा था
बरेली, अमृत विचार। कोर्ट का फैसला आने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने यह कहते हुए प्रतिक्रिया व्यक्त की कि आज 14 साल के बाद 2010 के दंगे का वनवास खत्म हो गया है। न्याय के मंदिर के स्वत: संज्ञान लेने पर दंगा कराने वाले मास्टर माइंड और दूसरे दोषियों को सजा मिलेगी। यह हम सबकी जीत है। बधाई...।
राजेश अग्रवाल ने कहा कि तौकीर रजा खां की तकरीर के बाद कोहाड़ापीर में दंगाइयों ने हिंदुओं की दुकानों को जला दिया था और लूटपाट की थी। मुसलमानों की हरा झंडा लगी दुकानों को छोड़ दिया था। उस वक्त वह अकेले योद्धा की तरह शहर को दंगे से बचाने के लिए लड़ रहे थे। इस्लामिया इंटर कॉलेज के ग्राउंड में 15-20 हजार और आजाद इंटर कॉलेज में 14-15 हजार मुस्लिम इकट्ठे हो गए थे। तब उन्होंने अपने क्षेत्र के लोधी समाज को जागृत किया।
उनकी आवाज पर लोधी समाज की महिलाओं-पुरुषों समेत चार से पांच हजार लोग इकट्ठे होकर उनके साथ खड़े हुए। उस दौरान पुलिस-प्रशासन के अफसर शहर छोड़कर भाग गए थे। लोधी समाज के साथ मिलकर उन्होंने पूरे शहर को दंगाइयों से बचा लिया, तब उसके बाद अफसर आए थे। उन्होंने बताया कि कोर्ट से आदेश जारी होने के बाद शाम को तमाम लोगों ने उनके घर आकर इसे समाज की बड़ी जीत बताते हुए उन्हें बधाई दी है।
ये भी पढे़ं- बरेली: पुलिस ने होटल से 10 जुआरियों को किया गिरफ्तार, 2.37 लाख बरामद
