बरेली: पहले रोजगार के लिए लगाने दीं दुकानें अब बता रहे अवैध

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली कॉलेज के पीछे पिंक जोन में अस्थाई दुकानें हटाने पर शनिवार को महिलाओं ने लगाए अफसरों पर आरोप

बरेली, अमृत विचार। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बरेली कॉलेज के पूर्वी गेट के पास पिंक जोन में आवंटित दुकानें हटाने का स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने विरोध किया और नगर निगम और डूडा के अफसरों पर गंभीर आरोप लगाए।

महिलाओं का आरोप है कि जब निगम की अस्थाई दुकानें वैध बताकर छोड़ी गईं तो उनकी दुकानें अवैध कैसे हो गईं, जबकि एक साल पहले नगर निगम और डूडा की तरफ से उनको दुकानें आवंटित कर रोजगार करने के लिए दी गई थीं। शुरू में नगर निगम की ओर से ही टेंट आदि की व्यवस्था की गई, जिसके बदले में प्रतिदिन शुल्क वसूला जाता रहा। 

कुछ समय बाद डूडा की सहमति पर टीन के खोखे बनाकर काम करने की अनुमति दे दी गई। आरोप लगाया कि पिछले साल अधिकारी भी दुकानों पर आए थे लेकिन तब कोई हस्तक्षेप नहीं किया था। इस पर उन्होंने कारोबार बढ़ा लिया। बैंक से कर्ज लेकर किसी ने चाय बिस्कुट की दुकान तो कोई रेडिमेड कपड़ों की दुकान लगाने लगा। इधर निगम के अधिकारियों के मुताबिक कुछ महिलाओं ने पिंक जोन में अवैध दुकानें लगा लीं। केवल उनको ही हटवाया गया है। वहीं नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि 23 दुकानें सही हैं। पांच अवैध दुकानों को ही हटाया गया है।

डीएम के यहां शिकायत पर बिफर पड़े अफसर
महिलाओं ने आरोप लगाया कि शुक्रवार को वह पूरे मामले की शिकायत करने जिलाधिकारी कार्यालय गए। यहां जिलाधिकारी के नहीं मिलने पर उनके कार्यालय से नगर निगम को फोन कर समस्या सुनने के लिए कहा गया। इसके बाद जब नगर निगम पहुंचे तो वहां अतिक्रमण प्रभारी ने कहा कि शिकायत की तो इसका अंजाम भी भुगतान पड़ेगा। इसके अगले ही दिन नगर निगम की टीम ने दुकानें हटवा दी। महिला स्वयं सहायता समूह की पदाधिकारियों के मुताबिक शनिवार को फिर से डूडा दफ्तर पहुंचे, लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई। कहा गया कि उनका महिलाओं की ओर से पिंक जोन में लगाई दुकानों से कोई मतलब नहीं, सिर्फ नगर निगम वाले जाने।

अधिकारियों ने बेवकूफ बनाया है। एक साल पहले पिंक जोन में डूडा और नगर निगम की ओर से स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को दुकानें आवंटित की गईं थीं। दुकान में टीन शेड आदि डालने पर करीब 80 हजार रुपये खर्च किए। दुकानें हटाकर हमारे साथ अन्याय किया गया।- मीना

झूठा दिलासा देकर दुकानें आवंटित की गई। कहा गया था पैसा लगाकर काम शुरू करो और घर परिवार का पालन पोषण करो। डूडा के अधिकारियों से सहमति मिलने पर ही टीन की दुकान बनाई थी। अब डूडा के अफसर पूरी तरह से चुप्पी साधे हैं। टीन शेड बनवाने में करीब 60 हजार रुपये खर्च हुए थे।-ममता

पिंक जोन में नगर निगम की दुकानें भी हैं। उनको वैध बताया जा रहा है, जबकि इनके साथ ही हमने काम शुरू किया था। दस फीसदी ब्याज पर लोन लेकर कुछ महीने पहले ही कपड़ा का काम शुरू किया था। शुक्रवार को दुकान पर लगा बैनर निगम की टीम उतार ले गई थी।- सलमा परवीन

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