न्यायिक कार्यवाही के उचित चरण में हो संपत्तियों और देनदारीयों का प्रकटीकरण :हाई कोर्ट 

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

प्रयागराज, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भरण पोषण मामले में संपत्तियों और देनदारीयों के प्रकटीकरण से संबंधित आदेश में कहा कि जब सीआरपीसी की धारा 125 या घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 के तहत कोई शिकायत संबंधित न्यायालय के समक्ष दाखिल की जाती है, तो आर्डर शीट पर एक विशिष्ट आदेश पारित कर संबंधित पक्षकारों को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए दिशा निर्देशानुसार संपत्ति और देनदारी के खुलासे का हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देता है। इसके साथ ही आदेश की तिथि से भरण पोषण देने हेतु कोई भी आदेश पारित नहीं किया जाना चाहिए। परिवार न्यायालय का यह कर्तव्य है कि वह सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन में पक्षकारों को संपत्तियों और देनदारीयों के प्रकटीकरण का हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देने वाला एक विशिष्ट आदेश पारित करें। 

वर्तमान मामले में पक्षकारों को अप्रैल 2024 को ट्रायल कोर्ट के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया गया। इसके साथ ही ट्रायल कोर्ट को अनावश्यक स्थगन दिए बिना पक्षकारों को शीघ्रता से और अधिकतम 2 महीने के भीतर मामले को निस्तारित करने का निर्देश दिया गया। अंत में कोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को इस आदेश की प्रति सभी जिला न्यायाधीशों और परिवार न्यायालय के पिठासीन अधिकारियों के माध्यम से सभी मजिस्ट्रेट को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, जिससे न्यायिक कार्यवाही के उचित चरण में संपत्तियों और देनदारी के प्रकटीकरण के हलफनामे को आमंत्रित करने की प्रक्रिया अपनाई जा सके। उक्त आदेश न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन की पीठ ने संतोष कुमार जायसवाल की याचिका पर सुनवाई करने के दौरान पारित किया। याची ने घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 के तहत पारित जिला न्यायाधीश, कुशीनगर द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी थी।

ये भी पढ़ें -Budaun: एक साथ आजीवन सजा काटेंगे पिता-पुत्र और पोता, हत्या के मामले में कोर्ट ने सुनाया फैसला...जानिए पूरा मामला

संबंधित समाचार