IFFCO: धरना समाप्त कराने पहुंचे एसडीएम, जिद पर अड़े किसान
फाइल फोटो
आंवला, अमृत विचार: आचार संहिता लागू होने के बाद एसडीएम ने इफको के खिलाफ तहसील के सामने चल रहे धरने को समाप्त करने के लिए किसानों को समझाया, मगर वे नहीं माने। किसानों का आरोप है कि दबाव बनाकर धरना समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन वे मांगें पूरी न होने तक धरना जारी रखेंगे।
भारतीय किसान यूनियन टिकैत गुट के नेतृत्व में भूदाता किसान इफको में रोजगार पाने को 37 दिनों से तहसील कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। निवर्तमान एसडीएम गोविंद मौर्य की मध्यस्थता में छह बार इफको अधिकारियों के साथ बैठक हो चुकी है, मगर मांगों को लेकर दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन सकी।
एसडीएम ने शुक्रवार को इफको अधिकारियों को बुलाकर किसानों के हित में निर्णय लेने को कहा था। इसी बीच एसडीएम का स्थानांतरण हो गया। वहीं, शनिवार को लोकसभा चुनाव को लेकर आचार संहिता लागू हो गई। किसानों का आरोप है कि नवागत एसडीएम नहने राम ने शाम को आचार संहिता लगने की बात कहकर धरना समाप्त करने को कहा।
ऐसा न करने पर जेल भेजने की धमकी दी। किसानों का आरोप है कि इफको ने लिखित समझौता के बाद भी उन्हें रोजगार नहीं दिया। इसलिए वे मजबूरी में धरने पर बैठे हैं। समझौते में तत्कालीन एसडीएम के भी हस्ताक्षर हैं। कहा कि प्रशासन उनका धरना समाप्त कराने की बजाय इफको पर भूदाताओं को रोजगार देने का दबाव बनाए।
किसानों ने आरोप लगाया कि इफको अधिकारी आचार संहिता का लाभ लेने के लिए धरना समाप्त कराने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि भूदाताओं को रोजगार न देना पड़े। विधानसभा चुनाव के दौरान भी किसानों का करीब 13 माह तक धरना चला था। किसानों ने बताया कि उनकी मांगे पूरी न होने तक धरना जारी रहेगा। भले ही प्रशासन उन्हें जेल भेज दे।
आचार संहिता लागू होने के कारण हमने किसानों को समझने का प्रयास किया। कहा कि अभी धरना समाप्त कर चुनाव के बाद पुन : शुरू कर सकते हैं, मगर किसान नहीं माने। उन्हें समझाकर धरना समाप्त कराया जाएगा---नहने राम, एसडीएम।
यह भी पढ़ें- बरेली और आंवला में 3492 बूथों पर पड़ेंगे वोट, 33.54 लाख मतदाता बनेंगे भाग्य विधाता
