बरेली: छह माह भी नहीं चल सकीं हैंड सैनेटाइजेशन मशीनें, बढ़ा संक्रमण का खतरा
बरेली,अमृत विचार। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए शहर के सार्वजनिक स्थलों पर ऑटोमेटिक और टच फ्री हैंड सैनेटाइजर मशीनें लगवाई गई थीं। कई सरकारी और निजी दफ्तरों में तो समाजसेवियों ने भी हैंड सैनेटाइजर मशीन लगवाई थीं। लेकिन ये मशीनें कुछ दिन बाद ही बदहाल होने लगीं। आमजन के लिए लगवाई गई इन हैंड …
बरेली,अमृत विचार। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए शहर के सार्वजनिक स्थलों पर ऑटोमेटिक और टच फ्री हैंड सैनेटाइजर मशीनें लगवाई गई थीं। कई सरकारी और निजी दफ्तरों में तो समाजसेवियों ने भी हैंड सैनेटाइजर मशीन लगवाई थीं। लेकिन ये मशीनें कुछ दिन बाद ही बदहाल होने लगीं। आमजन के लिए लगवाई गई इन हैंड सैनेटाइजर मशीनों को देखकर लगता है कि जागरूकता अब बीते समय की बात हो गई है।
दैनिक ‘अमृत विचार’ ने गुरुवार को शहर के रेलवे जंक्शन, रोडवेज स्टैंड, जिला अस्पताल, महिला जिला अस्पताल और कलेक्ट्रेट में लगी हैंड सैनेटाइजर मशीन का रियलिटी चेक किया। इसमें से अधिकांश मशीनें खराब हालत में मिलीं। इनमें कुछ मशीनें चलताऊ हालत में थीं तो उन्हें कंडम बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जा रही थी। इस कारण आने वाले लोग बिना सैनेटाइज किए ही अफसरों के पास पहुंच रहे थे। आइए बताते हैं आपको शहर के सार्वजनिक स्थलों का हाल।
1- जिला महिला अस्पताल
जिला महिला अस्पताल में आने वाले मरीजों और तीमारदारों के लिए टच फ्री हैंड सैनेटाइजेशन मशीन लगवाई थी लेकिन दोपहर करीब 12 बजे आने वाले मरीज बिना सैनेटाइजेशन और सोशल डिस्टेंसिंग के ही लाइन में लग रहे थे। अस्पताल परिसर में लगी सैनेटाइजर मशीनों में सैनेटाइजर नहीं होने के कारण मरीज मशीन का इस्तेमाल नहीं कर पाए।

2- जिला अस्पताल
अनलॉक-5 में जिला अस्पताल की ओपीडी खुलने से मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। भीड़ बढ़ने से सामाजिक दूरी का भी पालन नहीं हो पा रहा है। यहां लगवाई गई ऑटोमेटिक हैंड सैनेटाइजर मशीन खराब पड़ी है। इसके अलावा अस्पताल में आने वाले मरीजों के लिए भी हैंड सैनेटाइजर की कोई व्यवस्था नहीं है। इससे संक्रमण का खतरा बना हुआ है जबकि अस्पताल में अधिक जागरूकता दिखनी चाहिए लेकिन ऐसा नहीं था। शासन की ओर से लाखों रुपये का बजट सैनेटाइजर के लिए दिया गया है।

3- रेलवे जंक्शन
रेलवे जंक्शन पर सभी पैसेंजर्स रेलवे प्लेटफार्म पर एंट्री से पहले अपने हाथ सैनेटाइज करें, इसके लिए जंक्शन के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने दो टच फ्री हैंड सैनेटाइजर मशीनें लगवाई गई थीं। साथ ही एक सैनेटाइजर मशीन भी लगवाई गई। जब तक श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई गईं तब तक तो ये मशीनें ठीक रहीं लेकिन अब इन मशीनों में सैनेटाइजर भी फिल नहीं किया जाता है। मशीनें भी खराब होने की कगार पर हैं। सिर्फ एक मशीन है जिससे पानी से हैंड वॉश किए जा सकते हैं जबकि दूसरी मशीन खराब है।

4- पुराना रोडवेज बस अड्डा
पुराने रोडवेज बस अड्डे पर सबसे अधिक यात्री आते-जाते हैं। यहां आने वाले यात्रियों के लिए ऑटोमेटिक हैंड सैनेटाइजर मशीन भी लगवाई गई है लेकिन यह मशीन कुछ दिन चलने के बाद शोपीस बनकर रह गई है। अब इससे हैंड सैनेटाइज नहीं किए जा सकते हैं। मशीन खराब है। इसके चलते यहां आने वाले यात्री और कर्मचारी या तो अपना सैनेटाइजर लेकर आते हैं या बगैर हैंड सैनेटाजेशन के घूमते हैं।

5- कलेक्ट्रेट
कलेक्ट्रेट गेट में एंट्री करते ही बाईं तरफ टच फ्री हैंड सैनेटाइजेशन मशीन लगवाई गई थी। इसमें एक तरफ सैनेटाइजर तो दूसरी तरफ पानी से हैंड वॉश कर सकते थे। मंडे को इस मशीन को देखा गया तो बेसिन में कचरा भरा होने से पूरी बेसिन में पानी भरा हुआ था जबकि सैनेटाइजर तो था ही नहीं। इसे देखकर लग रहा था कि इस मशीन को कई दिन से किसी ने यूज ही नहीं किया।

