Kanpur: अब आसानी से बन सकेगा लोटस सिल्क; सीएसए की प्रोफेसर ने बनाया कमल के तने से रेशे निकालने का उपकरण
कानपुर, अमृत विचार। अब ‘लोटस सिल्क’ को बनाना आसान हो गया है। सीएसए विवि की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ रितु पांडेय ने एक ऐसा उपकरण तैयार किया है, जिससे कमल के तने से आसानी से रेशे निकाले जा सकते हैं। उपकरण को भारत सरकार की ओर से पेटेंट प्रमाण पत्र भी दे दिया है।
उपकरण की सहायता से कामगारों को भी कमल के तने से रेशे निकालने में आसानी हो सकेगी। विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ खलील खान ने बताया कि कुलपति डॉ आनंद कुमार सिंह व डीन कम्युनिटी साइंस डॉ मुक्ता गर्ग ने डॉ रितु पांडे को शुभकामनाएं दी हैं।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के गृह विज्ञान महाविद्यालय के वस्त्र एवं परिधान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ रितु पांडेय ने बताया कि इस शोध को उन्होंने वर्ष 2016 में शुरू किया था। कमल के तने से निकलने वाले रेशों की कीमत फिलहाल 32 डॉलर प्रति सौ ग्राम है।
मणिपुर सहित कई स्थानों पर इसका बड़े स्तर पर कारोबार होता है। अभी तक कोई उपकरण न होने से कमल के तने से रेशे हाथ से ही निकाले जाते हैं। इससे बहुत अधिक मात्रा में रेशे खराब हो जाते हैं। अब उपकरण के आने से ‘लोटस सिल्क’ का कारोबार करने वाले किसानों के रेशे खराब नहीं होंगे।
मशीन की खासियत
डॉ. रितु पांडेय ने बताया कि छोटे आकार की मशीन को आसानी से एक हाथ से चलाया जा सकता है। मशीन को चलाने के लिए बिजली की जरूरत होती है। इस मशीन से सिर्फ तीन मिनट में ही सौ ग्राम रेशे आसानी से निकाले जा सकते हैं।
ऐसे होता है कारोबार
उन्होंने बताया कि कमल के तने से धागा निकालने व उससे कपड़ा बनाने की प्रक्रिया केमिकल से रहित है। कमल के तने से रेशे निकालने का कार्य भारत, म्यांमार व कंबोडिया में होता है। लोटस सिल्क वस्त्रों की डिमांड यूरोपीय देशों में ज्यादा है।
