प्रयागराज: टीजीटी भर्ती मामले में नया पैनल तैयार करने का निर्देश
प्रयागराज, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) पदों पर सहायक शिक्षकों की भर्ती के एक मामले में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए गलत तरीके से आवंटित रिक्तियों के खिलाफ प्रतीक्षा सूची के उम्मीदवारों का समायोजन करने के लिए नए सिरे से पैनल तैयार करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति अजीत कुमार द्वारा परित यह आदेश सार्वजनिक रोजगार और आरक्षण नीतियों के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय हस्तक्षेप का प्रतीक है। कोर्ट ने अपने विशेष टिप्पणी में कहा कि किसी को भी सार्वजनिक रोजगार में नियमों के विरुद्ध नियुक्त नहीं किया जा सकता है। अभ्यर्थी द्वारा नियमों की गलत व्याख्या करने की संभावना संभव है।
कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक निर्णय में कहा कि आरक्षण के नियम के मामले में कानून बहुत स्पष्ट है। मेरिट सूची तैयार करते समय चयनकर्ता निकाय को यह देखना होगा कि ऊर्धवाधर आरक्षण के संबंध में प्रत्येक श्रेणी का अंतिम कट ऑफ अंक क्या है। सामान्य से आरक्षित श्रेणी में कोई प्रवासन नहीं होता है, बल्कि आरक्षित श्रेणी से सामान्य श्रेणी में प्रवास संभव है। इसलिए सामान्य श्रेणी को खुली श्रेणी कहा जाता है। इस सिद्धांत पर सार्वजनिक रोजगार में योग्यता को ध्यान में रखा जाना चाहिए और योग्य उम्मीदवारों को आरक्षित श्रेणियों के बावजूद प्राथमिकता मिलनी चाहिए। जब आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार सामान्य वर्ग के अंतिम कट ऑफ से अधिक अंक प्राप्त करने में सफल हो जाता है, तो ऐसे आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार को खुली श्रेणी में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। अतः विपक्षियों को प्रतीक्षा सूची से एक नया पैनल तैयार करने का निर्देश जारी किया गया, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके की कार्यवाही के दौरान चर्चा किए गए सिद्धांतों के अनुसार नियुक्तियां की गई है। दरअसल याची अखिलेश कुमार और तीन अन्य का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता ने चयन प्रक्रिया में उनकी पात्रता और भागीदारी का हवाला देते हुए ओबीसी श्रेणी में अंतिम चयन सूची से उनके बहिष्कार का विरोध किया जिससे मौजूदा मामला उत्पन्न हुआ है।
ये भी पढ़ें -सक्षम प्राधिकारी से लिखित अनुरोध द्वारा त्यागपत्र वापस लेना संभव :हाई कोर्ट
