Special: कानपुर में दिव्यांग 1.16 लाख और वोटर मात्र 26 हजार; दिव्यांग पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उठाई जांच की मांग
2011 जनगणना में दिव्यांगों की संख्या 1,16292 थी, 2024 में जारी मतदाता सूची में संख्या सिर्फ 26478 ही
शिव प्रकाश मिश्रा, कानपुर। 2011 में हुई जनगणना में शहर में दिव्यांगों की संख्या 1,16292 थी लेकिन 2024 में जारी मतदाताओं की सूची में दिव्यांग वोटरों की संख्या सिर्फ 26478 ही है। ऐसा तब है जब केंद्र व प्रदेश सरकार के साथ प्रशासन मतदान प्रतिशत बढ़ने के लिए पूरा जोर लगा रहा है। मतदाता बनने के लिए तरह-तरह के अवसर दिए जाते हैं। अब सोचने का विषय है कि आखिरकार किन कारणों से इतनी अधिक संख्या में विकलांग मतदाता क्यों नहीं बन सके।
2011 की जनगणना के अनुसार कानपुर शहर में दिव्यांगों की संख्या 1,16292 थी। जिसमें पुरुषों की संख्या 68633 और दिव्यांग महिलाओं की संख्या 47659 बताई गई। दिव्यांग वोटरों की संख्या सिर्फ 26478 ही है। इस हिसाब से देखें तो 89824 दिव्यांग ऐसे हैं जो मतदाता नहीं बन सके।
जबकि शासन व प्रशासन के स्तर पर बीएलओ की तैनाती, बूथ लेवल पर मतदाता कार्यक्रम, बीच-बीच में राजनीतिक पार्टियों की ओर से मतदाता सूची में नाम बढ़वाने का काम किया जाता रहता है। मतदाता जागरुकता कार्यक्रम, स्लोगन, बैनर, पोस्टरों से लोगों को जागरूक किया जाता है।
सवाल यह भी है कि दो-चार हजार लोगों के नाम मतदाता सूची में न दर्ज हो सके तो लोग हल्ला मचाने लगते हैं, लेकिन 89 हजार से अधिक दिव्यांगों का नाम मतदाता सूची में न होने पर कुछ नहीं हुआ। इधर चुनाव आयोग ने दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधा भी प्रदान की है कि उन्हें अगर दिक्कत है और वह स्वीकृति देते हैं तो उनका बैलेट से मतदान कराया जाएगा।
मतदान के प्रति जागरुकता की कमी
जब सरकार, शासन व प्रशासन की ओर से मतदाता बनाने के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हों तो ऐसे में दिव्यांग वर्ग का मतदाता न बन पाना जागरुकता की कमी ही हो सकती है। अगर कहा जाए कि दिव्यांग भागदौड़ नहीं कर सके तो गलत होगा। क्योंकि अब तो ऑनलाइन मतदाता बनने की व्यवस्था है।
सवाल उठाए, जांच की मांग की
राष्ट्रीय दिव्यांग पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार ने मतदाता सूची में दिव्यांगों की संख्या देखने के बाद जिला निर्वाचन अधिकारी और चुनाव आयोग को पत्र भेजकर शिकायत की है कि नगर में दिव्यांग मतदाताओं की संख्या पर आपत्ति है। उन्होंने पत्र में 2011 की जनगणना व मौजूदा वोटरों का जिक्र करते हुए कहा है कि इतने दिव्यांग मतदाता बनने से किन कारणों से रह गए। इसकी जांच होनी चाहिए। मामले की जांच करवाकर शेष दिव्यांगजनों को मतदाता बनवाया जाए।
