Loksabha election 2024: रंगई, अंशू, श्याम समेत सात दृष्टिबाधित ब्रेल लिपि बैलेट से डालेंगे वोट

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उत्तराखंड के देहरादून से लाई जाएगी ब्रेल लिपि, पीठासीन को मिलेगा प्रशिक्षण

रीतेश श्रीवास्तव/ बाराबंकी, अमृत विचार। लोकसभा चुनाव में इस बार सात मतदाता ऐसे हैं जो ब्रेल लिपि बैलेट से अपने सांसद का चुनाव करेंगे। यह मतदाता पूरी तरह से दृष्टिबाधित हैं। वैसे दृष्टिबाधित मतदाताओं की संख्या 3 हजार 936 हैं लेकिन इनमें से सात वह मतदाता हैं जो ब्रेल लिपि की मदद से पढ़ लिख सकते हैं। ऐसे में इनसे वोट डलवाने के लिए उत्तराखंड के देहरादून स्थित राजकीय प्रेस से ब्रेस लिपि मंगवाई जाएगी। पीठासीन अधिकारियों का बकायदा इसका प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। वहीं शेष दृष्टिबाधित मतदाताओं को उनके परिवार के किसी एक सदस्य के साथ सहायक के रुप में लेकर जाकर वोट डाला जाएगा। हालांकि इसके लिए भी बूथ पर एक फार्म भरवाया जाएगा।

भारत निर्वाचन आयोग की मंशा है कि लोकसभा चुनाव में ज्यादा से ज्यादा मतदान हो। इसके लिए बूथों पर मतदाताओं को तमाम तरह की सुविधाएं दी जा रही हैं। बूथों पर पानी, बिजली, बैठने की व्यवस्था आदि इंतजाम किए जा रहे हैं। लेकिन, आयोग की तमाम व्यवस्थाओं के बाद भी बड़ी तादाद में दिव्यांग मतदाता अपने मतदाधिकार का प्रयोग नहीं कर पाते हैं। खासकर, दृष्टिबाधित मतदाता। लिहाजा, निर्वाचन आयोग ने दृष्टिबाधित मतदाताओं की सुविधा के लिहाज से बूथों में ब्रेल लिपि बैलेट शीट का इंतजाम किया जा रहा है। इस बैलेट सीट में राजनैतिक दलों के चुनाव चिन्ह, प्रत्याशी का नाम आदि का पूरी जानकारी होगी, जिसके बाद दृष्टिबाधित मतदाता आसानी प्रत्याशी एवं उसके चिन्ह की पहचान कर सकेंगे। इसके बाद अपने मतदाधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। आयोग की निर्देशों के अनुरुप जिले में ऐसे सात दृष्टिबाधित मतदाताओं का चिन्हांकन किया गया है। इनमें कुर्सी विधानसभा क्षेत्र के श्यामजी पुत्र कीढ़ी लाल, रामनगर के धनन्जय पुत्र विजय कुमार व नितेश पुत्र रामनरेश, बाराबंकी क्षेत्र से छोटेलाल पुत्र शिवराज व अंशु पुत्र रामानंद, जैदपुर क्षेत्र से मनोज पुत्र श्रीपाल और हैदरगढ़ विधानसभा क्षेत्र से रंगई लाल पुत्र जगप्रसाद शामिल हैं। जिला निर्वाचन मजिस्ट्रेट सत्येंद्र कुमार ने बताया कि जिले में करीब 21 हजार से अधिक दिव्यांग मतदाता हैं। इनमें से सात ऐसे दृष्टिबाधित मतदाताओं को चिन्हित किया गया है। जो ब्रेल लिपि से पढ़ने- लिखने का ज्ञात रखते हैं। इनके लिए ब्रेस लिपि बैलेट शीट मंगवाई जाएंगी, जिस पर दृष्टिबाधित मतदाता अपने मतदाधिकार का प्रयोग कर सकेंगे।

विधान सभावार पुरूष व महिला दिव्यांग वोटर
266 कुर्सी--2487--1205--3642
267 रामनगर--2251--1359--3610
268 बाराबंकी-- 2178--  1022--3200
269 जैदपुर--  2460--1099--3559--
270 दरियाबाद--  2942--1533--4475
272 हैदरगढ़--   2005--1101--3106
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कुल दिव्यांग वोटर--14323--7318--21642
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नोट--जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराए गए  दिव्यांगों के इन आंकड़ों में दृष्टिबाधित, हाथ व पैर से विकलांगता, बोलने व सुनने में अक्षम के साथ मानसिक मंदित आदि श्रेणी के दिव्यांग मतदाता शामिल हैं। इनमें केवल दृष्टिबाधितों की कुल संख्या 3936 हैं। इनमें से सात दृष्टिहीन वोटर ब्रेल लिपि का ज्ञान रखते हैं।

क्या होती है ब्रेल लिपि
ब्रेल पद्धति एक तरह की लिपि है, जिसको विश्व भर में नेत्रहीनों को पढ़ने और लिखने में छूकर व्यवहार में लाया जाता है। इस पद्धति का आविष्कार 1821 में एक नेत्रहीन फ्रांसीसी लेखक लुई ब्रेल ने किया था। यह अलग-अलग अक्षरों, संख्याओं और विराम चिन्हों को दर्शाते हैं। इस लिपि में एक विशेष प्रकार के कागज का इस्तेमाल होता है, जिस पर उभरे हुए अक्षरों को छू -कर पढ़ा जा सकता है। किसी टाइपराइटर की तरह ही ब्रेल लिपि को भी एक मशीन जिसे 'ब्रेलराइटर' कहते हैं , के माध्यम से लिखा जा सकता है। इसमें 6 बिंदुओं के उपयोग से कुल 64 अक्षर और चिह्न होते हैं।

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