सुरक्षा में सेंध
महाराष्ट्र पुलिस ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) को भारतीय लड़ाकू विमानों से संबंधित खुफिया जानकारी देने के आरोप में हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया तो आईएसआई के देश के भीतर चल रहे जासूसी अभियान का गंभीर खुलासा हुआ है। आईएसआई का यह मॉड्यूल इतना खतरनाक था कि …
महाराष्ट्र पुलिस ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) को भारतीय लड़ाकू विमानों से संबंधित खुफिया जानकारी देने के आरोप में हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया तो आईएसआई के देश के भीतर चल रहे जासूसी अभियान का गंभीर खुलासा हुआ है। आईएसआई का यह मॉड्यूल इतना खतरनाक था कि उसने एचएएल जैसे सुरक्षा प्रतिष्ठान के कर्मचारी को ही अपने जाल में उलझा लिया और यहां के नागरिक से ही देश के बाहर सुरक्षा संबंधी गंभीर जानकारियां मंगवा रहा था। देश के रक्षा क्षेत्र में सुरक्षा के लिहाज से यह गंभीर सेंध ही मानी जाएगी।
महाराष्ट्र पुलिस ने जिस व्यक्ति को गिरफ्तार किया है उससे अब जानकारियां मिलेंगी कि किस तरह वह आईएसआई के संपर्क में आया और उसके लिए काम करने को तैयार हुआ, मगर इतना तय है कि खुफिया जानकारी देश से बाहर भेजने के लिए कोई तंत्र जरूर काम कर रहा होगा। अब खुफिया एजेंसियों के लिए यह चुनौती है कि वह आईएसआई की इस योजना का पर्दाफाश करे कि आखिर किन परिस्थिितयों में देश का एक नागरिक दुश्मन के लिए काम करने को तैयार हो जाता है?
आखिर उसे ऐसा कौन सा लालच दिया जाता है कि वह देशद्रोह जैसा गंभीर अपराध करने पर उतर जाता है। अब तक ऐसा देखने में आया है कि पाकिस्तान परस्त आतंकवादी संगठन सेना में जम्मू के युवाओं को अपने जाल में फंसाकर आतंकवादी बनाते आए हैं। जाहिर है कि ऐसा वह युवाओं को धर्म और जिहाद के नाम से फंसाकर करते हैं। इसके एवज में आतंकी गतिविधियों में शामिल युवाओं के परिवार को पाकिस्तान की ओर से मदद दिए जाने की बातें भी सामने आई हैं। मगर एचएएल जैसे सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान के कर्मचारी का आईएसआई के लिए काम करना चौंकाने वाला मामला है।
गिरफ्तार व्यक्ति भारतीय लड़ाकू विमान, उसकी संवेदनशीलता की विस्तृत जानकारी के साथ ही नासिक स्थित एचएएल विमान विनिर्माण इकाई, वायुसेना अ्डडे और विनिर्माण इकाई में प्रतिबंधित क्षेत्र संबंधी जानकारी भी आईएसआई तक पहुंचा रहा था। नासिक विमान प्रभाग मिग-21 एफएल विमान, के-1 मिसाइलों के साथ ही अन्य मिग विमानों का भी निर्माण करता है। ऐसे में इस प्रतिष्ठान से संबंधित जानकारी दुश्मन के पास पहुंचना बहुत ही गंभीर चूक के दायरे में आता है। लिहाजा ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए इस मामले की तह तक पहुंचना अब बेहद जरूरी है ताकि फिर कोई घर का भेदी देशद्रोह जैसे गंभीर अपराध के बारे में सोचने भी न पाए।
