बेरोजगारों के शोषण को कम करने के लिए शिक्षा और जागरूकता अभियान विकसित करने की आवश्यकता: हाईकोर्ट

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Edited By Amrit Vichar
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोजगार के फर्जीवाड़ों के मामले में अपनी विशेष टिप्पणी में कहा कि छात्रों और नौकरी की इच्छा रखने वालों को यह समझाने की आवश्यकता है कि वैध रोजगार के अवसर केवल योग्यता और मेहनती प्रयास के माध्यम से ही प्राप्त किए जाते हैं। यह सरकार का कर्तव्य है कि वह भर्ती प्रक्रिया की अखंडता को बनाए रखे और उन लोगों के खिलाफ कड़े कदम उठाए जो फर्जी तरीके से निर्दोष व्यक्तियों की आकांक्षाओं का फायदा उठाना चाहते हैं।

जिन व्यक्तियों को रोजगार के झूठे वादों के बदले में अपनी मेहनत की कमाई छोड़ने के लिए गुमराह किया जाता है, वे अक्सर भावनात्मक संकट, टूटी हुई उम्मीदों और विश्वासघात का आघात झेलते हैं। इसके अलावा पीड़ित व्यक्ति खुद को सामाजिक रूप से बहिष्कृत और कलंकित पाता है। उक्त टिप्पणी न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की पीठ ने चंद्रशेखर प्रसाद की याचिका खारिज करते हुए की।

याची के विरुद्ध आईपीसी के विभिन्न धाराओं के अंतर्गत पुलिस स्टेशन भटनी जिला देवरिया में प्राथमिक ही दर्ज की गई थी। कोर्ट ने आगे कहा कि धोखाधडी वाली योजनाओं को पहचानने और उनका विरोध करने के लिए आवश्यक ज्ञान और महत्त्वपूर्ण कौशल के साथ व्यक्तियों को सशक्त बनाने के लिए व्यापक शिक्षा और जागरूकता अभियान विकसित किए जाने की आवश्यकता है, जिससे व्यक्तियों के शोषण की संभावना कम हो सके।

मामले के अनुसार याची ने अपने सह-अभियुक्तों के साथ मिलकर सोच समझ कर शिकायतकर्ता और उसके बहनोई को नौकरी दिलाने के नाम पर कई लाख रुपए लिए थे। धनराशि प्राप्त करने के बावजूद वादे के मुताबिक नियुक्ति नहीं करवाई गई।

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