बरेली: ‘इस्लाम के नाम पर आतंक फैलाने की इजाजत नहीं’
बरेली,अमृत विचार। तीन रोजा 102वें उर्स-ए-रजवी के आखिरी दिन बुधवार को आला हजरत के कुल शरीफ की रस्म अदा की गयी। सभी रस्में दरगाह आला हजरत और इस्लामियां मैदान में कोविड-19 की गाइडलाइन के अनुसार अदा की गईं। कुल की रस्म में उलेमा ने कहा कि दुनिया आतंकवाद से जूझ रही है। हर जगह हमले …
बरेली,अमृत विचार। तीन रोजा 102वें उर्स-ए-रजवी के आखिरी दिन बुधवार को आला हजरत के कुल शरीफ की रस्म अदा की गयी। सभी रस्में दरगाह आला हजरत और इस्लामियां मैदान में कोविड-19 की गाइडलाइन के अनुसार अदा की गईं। कुल की रस्म में उलेमा ने कहा कि दुनिया आतंकवाद से जूझ रही है। हर जगह हमले हो रहे हैं। धर्म की आड़ में बेगुनाहों का खून किया जा रहा है जबकि इस्लाम दहशतगर्दी की इजाजत बिल्कुल नहीं देता। इस्लाम के नाम पर आतंक फैलाने वाले इंसानियत के दुश्मन हैं। इस्लाम के नाम पर किसी को भी आतंक फैलाने की इजाजत नहीं है।
दोपहर में बड़ी सादगी से इस्लामियां मैदान पर उर्स-ए-रजवी के कुल की रस्म अदा की गई। इसके साथ ही तीन रोजा उर्स ए रजवी का समापन हो गया। इस दौरान मुफ्ती सलीम नूरी ने अपने खिताब में कहा कि अगर हमें कुरान से रहनुमाई हासिल करनी है तो पहले हदीस को समझना होगा। हदीस को समझने के लिए बुजुर्गों के नक्शेकदम पर चलना होगा। आज का नौजवान तबका गुमराही से दूर रहे। बिना तस्दीक किसी भी सोशल मीडिया पर किये गए पोस्ट पर यकीन न करें। इस्लाम के नाम पर किसी को भी आतंक फैलाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। इंटरनेट पर हिंसा फैलाने वाले मैसेज को नजरअंदाज करें। कोई ऐसा मैसेज देखें तो फौरन पुलिस को खबर करें।
दरगाह प्रमुख सुब्हानी मियां और सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां ने हमेशा दहशतगर्दी की मजम्मत की है। आला हजरत ने हमेशा अमन और शांति का पैगाम दुनियाभर को दिया। इसके साथ ही उर्स के मंच से बेटियों की सुरक्षा के लिए उन्हें पर्दे में रखने की अपील की गई।
