पीलीभीत: सरकारी स्कूल का हाल: मास्साब को चाहिए 50 किलो गेहूं, बच्चों से करा रहे काम...कोटेदार परेशान! 

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Edited By Amrit Vichar
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बिठौराकलां, अमृत विचार: बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में एक तरफ शैक्षिक स्तर बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं कुछ जिम्मेदार शासन की मुहिम को बट्टा लगाने में जुटे हैं। अभी मरौरी ब्लॉक क्षेत्र के एक शिक्षक का एडवांस में हाजिरी लगाकर जाने का मामला शांत नहीं हो सका था कि अब एक अन्य  स्कूल से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। जिसमें प्रधानाध्यापक पर बच्चों से स्कूल में कामकाज कराने और कोटेदार पर 50 किलो राशन देने का दबाव बनाने का आरोप लगा है। वीडियो वायरल होने के बाद खलबली मच गई है।

सोशल मीडिया पर वायरल किए गए वीडियो में मामला मरौरी ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत खाग के मजरा पुरवा के प्राइमरी स्कूल का बताया गया है। आरोप है कि यहां पर तैनात प्रधानाध्यापक गांव के कोटेदार से प्रतिमाह पचास किलो गेहूं मांग रहे हैं। मिड डे मील का राशन कोटेदार देता भी है, लेकिन प्रधानाध्यापक को अलग से 50 किलो गेहूं देने पड़ते हैं। 

कुछ फोटो व वीडियो सर्दी के मौसम के वायरल किए गए हैं। जिसमें बच्चे हाथ में कुल्हाड़ी लिए लकड़ी का बोटा काटते दिखाई दे रहे हैं। इसे लेकर भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि बच्चों से मेहनत मजदूरी कराई जा रही है, न कि पढ़ाई। बच्चों से साफ सफाई कराने से लेकर कथित तौर पर कोटेदार से लिए गेहूं बाइक पर ले जाते हुए का भी वीडियो वायरल किया गया है। जिसके बाद खलबली मची हुई है। हालांकि प्रधानायापक ने खुद पर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताया है।

ग्रामीणों ने भी अव्यवस्था को लेकर उठाए सवाल
एक तरफ कोटेदार की ओर से प्रधानाध्यापक पर आरोप लगाया गया है। वहीं, कुछ ग्रामीणों ने भी प्राइमरी स्कूल की अव्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि विद्यालय परिसर में गंदगी रहती है। कई जगह टूट-फूट भी है। उसका सुधार नहीं हो सका है।

गांव के ही लालाराम का कहना है कि प्रधानाध्यापक एवं एक सहायिका है। स्टाफ कम होने पर पढ़ाई ठीक से नहीं हो पा रही। गावं के ही मेवाराम का कहना है कि आलम ये है कि कक्षा पांच के बच्चे हिंदी भी ठीक से नहीं पढ़ पाते हैं। आरोप लगाया कि जो बच्चा स्कूल नहीं जाता है, उससे बाद में एक रुपये लिया जाता है। शिकायत इसलिए नहीं की गई ताकि बच्चों पर गुस्सा न निकाला जाए।

प्रधानाध्यापक हर माह 50 किलो राशन अपने लिए मांगते हैं। कहते हैं कि नहीं दोगे तो राशन से जुड़े रजिस्टर पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे। इससे जुड़े साक्ष्य भी मौजूद हैं। एक दो बार मेरे द्वारा वीडियो बना लिए गए थे--- सत्यपाल उर्फ पप्पू, कोटेदार का पुत्र।

कोटेदार पर तीन क्विंटल राशन पहले का बकाया है। कोटेदार ने कहा था कि जब जरुरत पड़े तो उसे ले लेना। इसी को लेकर राशन मांगा गया था। गलत तरीके से आरोप लगाए जा रहे हैं। गेहूं का कट्टा बाइक पर पिसवाने के लिए ले जाते वक्त फोटो खींच लिया गया था। बच्चों से काम नहीं कराया जाता है। सर्दी के दिनों में खुद ही कुछ बच्चे कुल्हाड़ी लेकर अलाव के लिए लकड़ी काटने लगे थे। ये पुराने वीडियो हैं--- राजेश शर्मा, प्रधानाध्यापक।

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